मौनी अमावस्या पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब: संगम से अयोध्या तक लाखों ने लगाई डुबकी, देखें वीडियो

Magh Mela: मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर प्रयागराज के माघ मेले, काशी और अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मौन रहकर पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य से भक्तों ने दिव्यता की अनुभूति की।

Mauni Amavasya: सनातन धर्म में माघ महीने की अमावस्या यानी मौनी अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। आज के दिन संगम की रेती, काशी के घाटों और अयोध्या की सरयू नदी में हजारों श्रद्धालुओं ने मौन व्रत धारण कर आस्था की डुबकी लगाई और अपने समस्त पापों के शमन की कामना की।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर किया जाने वाला 'मौन स्नान' मनुष्य की आंतरिक शुद्धि का आधार है। स्रोतों के अनुसार, जो व्यक्ति पांच कर्म इंद्रियों, पांच ज्ञान इंद्रियों और 11वें मन को एकाग्र कर मौन स्नान करता है, उसे माँ सरस्वती का प्रादुर्भाव प्राप्त होता है। यह स्नान चित्त की विकृतियों को दूर कर परम शांति प्रदान करने वाला माना गया है। माघ मेले या कुंभ/अर्ध कुंभ के दौरान इस स्नान की दिव्यता और बढ़ जाती है। विशेष रूप से आज रविवार का दिन होने के कारण भगवान भास्कर (सूर्य) की उपासना के साथ स्नान करने से व्यक्ति 'टेंशन फ्री' होकर दिव्यता का अनुभव करता है।

गंगा स्मरण और विष्णु लोक की प्राप्ति

स्रोतों में उल्लेख है कि त्रिवेणी संगम में स्नान का फल अनंत है। कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति 100 योजन की दूरी से भी पवित्र गंगा का स्मरण करता है, तो उसके समस्त दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का नाश हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार, गंगा का नाम जपने मात्र से व्यक्ति पाप मुक्त होकर विष्णु लोक को प्राप्त करता है। आज के दिन भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा, पूजा-पाठ और जप-तप में लीन दिखाई दिए। माघ मेले में इस अमावस्या को 'शाही स्नान' के समान महत्व दिया जाता है, जहाँ लाखों श्रद्धालु मोक्ष की कामना लेकर पहुँचते हैं।

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