
CM फडणवीस-शिंदे, उद्धव ठाकरे
Who Will be Mumbai Mayor: मुंबई का मेयर कौन होगा? बीएमसी रिजल्ट के बाद यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है। उससे भी अहम सवाल यह है कि आखिर मुंबई का मेयर किसका होगा – भाजपा का या एकनाथ शिंदे की शिवसेना का? बीएमसी चुनाव के परिणाम आने के बाद मेयर पद को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। अब बीएमसी मेयर पद पर फाइव स्टार होटल पॉलिटिक्स का खेल भी देखने को मिल रहा है।
बीएमसी चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद एकनाथ शिंदे ने अपने पार्षदों को फाइव स्टार होटल में शिफ्ट कर दिया। पहली नजर में यह ऐसा लगता है कि शिंदे को उद्धव ठाकरे गुट से अपने पार्षदों के टूटने का डर था, लेकिन घटनाक्रम पर गौर करें तो कहानी कुछ और ही प्रतीत होती है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह शिंदे की सोच-समझकर की गई रणनीति है। और इससे भी अधिक, यह कदम भाजपा के खिलाफ लिया गया, क्योंकि भाजपा को बीएमसी में बहुमत हासिल करने के लिए शिंदे की ज़रूरत है।
बीएमसी चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उसे प्रचंड जीत नहीं मिली। इस कारण वह अपने दम पर बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुँच पा रही है। भाजपा को मेयर पद पाने के लिए महायुति गठबंधन के साथी एकनाथ शिंदे का समर्थन लेना होगा। शिंदे भाजपा की इस मजबूरी को भलीभांति समझते हैं। यही कारण है कि अब शिंदे इस मौके का फायदा उठाकर मेयर का पद हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह कदम शिंदे का चालाक दिमाग है, जो भाजपा की मजबूरी को देखते हुए उठाया गया है।
एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास 29 पार्षद हैं। बीएमसी मेयर पद पर ‘होटल पॉलिटिक्स’ तब देखने को मिली जब 16 जनवरी को बीएमसी चुनाव के नतीजे आए। कुल 227 वार्डों में भाजपा ने 89 सीटें जीतीं, जबकि बहुमत के लिए 114 सीटें चाहिए थीं। एकनाथ शिंदे गुट ने 29 सीटें हासिल कीं। दोनों को मिलाकर महायुति गठबंधन के पास 118 सीटें हैं, जो बहुमत से थोड़ा ऊपर हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 65 सीटें मिलीं, कांग्रेस को 24 और मनसे को 6। विपक्ष करीब 100 सीटों के साथ बिखरा हुआ नजर आता है।
एकनाथ शिंदे देवेंद्र फडणवीस
मेयर का चुनाव जल्द होना है, जिसके लिए पार्षदों की वोटिंग होगी। शिंदे जानते हैं कि अगर उनके पार्षद टूट गए तो भाजपा का खेल भी बिगड़ सकता है। इसलिए उन्होंने 17 जनवरी को अपने सभी पार्षदों को बांद्रा के ताज लैंड्स एंड होटल में भेज दिया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह तीन दिनों के लिए है, जहां पार्षद आराम करेंगे और चुनाव की थकान उतारेंगे, लेकिन असल वजह राजनीतिक है।
अब सवाल यह उठता है कि शिंदे ने उद्धव से डरकर अपने पार्षदों को होटल में रखा या भाजपा को दबाव में लेने के लिए यह रणनीति अपनाई। पहली नजर में यह उद्धव गुट से डर के तौर पर दिखता है, क्योंकि उद्धव ने नतीजे आने के बाद मेयर बनने की इच्छा जताई थी। हालांकि, गहराई से देखें तो यह शिंदे की रणनीति लगती है। महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकार का कहना है कि शिंदे असल में भाजपा पर दबाव बनाना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि बीएमसी में शिवसेना का भी मेयर बने। इसलिए शिंदे की शिवसेना ने ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला भाजपा के सामने रखा है। 227 सीटों वाली बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का बदला? इस रणनीति के पीछे विधानसभा चुनाव की याद भी जुड़ी है। उस वक्त शिंदे मुख्यमंत्री थे और महायुति ने उनके चेहरे पर चुनाव लड़ा था। हालांकि जीत के बाद देवेंद्र फडणवीस को सीएम बनाया गया। शिंदे और अजित पवार को सिर्फ डिप्टी सीएम मिला, और गृह मंत्रालय फडणवीस के पास गया। शिंदे यह याद रखेंगे और इसलिए अब वे बीएमसी के जरिए भाजपा से कुछ राजनीतिक बदला लेने की कोशिश कर रहे हैं।
बीएमसी देश की सबसे अमीर नगर पालिका है, इसलिए मेयर पद पर कब्जा मतलब मुंबई की सत्ता पर कब्जा। अविभाजित शिवसेना ने अब तक बीएमसी पर राज किया है। अब शिंदे चाहते हैं कि ढाई साल के लिए ही सही, मगर उनका भी मेयर बने, ताकि शिवसैनिकों को संदेश मिले कि बालासाहेब ठाकरे की असली विरासत उनके पास है।
हालांकि, समय ही बताएगा कि शिंदे की चाल कैसी साबित होती है और उसका राजनीतिक असर क्या होगा। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई में मेयर कौन होगा, कब होगा और कितने समय के लिए होगा, यह सब शिंदे के साथ चर्चा के बाद तय होगा।
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इस स्थिति में शिंदे गुट ‘किंगमेकर’ बन गया है, क्योंकि भाजपा अपने दम पर मेयर पद पर कब्जा नहीं कर सकती।






