
Mumbai suburban stations (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai Suburban Stations: दिन-रात दौड़ती भागती मुंबई की लोकल और अन्य यात्री ट्रेनों में सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए शुरू की गई इमरजेंसी मेडिकल रूम (ईएमआर) सेवाएं आज बदहाली का शिकार हैं। मध्य और पश्चिम रेलवे के उपनगरीय स्टेशनों पर यात्रियों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ये सेवाएं अधिकांश स्टेशनों पर बंद पड़ी हुई हैं।
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली मध्य और पश्चिम रेलवे की लोकल ट्रेनों से प्रतिदिन लगभग 80 लाख यात्री सफर करते हैं। अत्यधिक भीड़, धक्का-मुक्की और अन्य कारणों से रोजाना कई यात्री दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। ऐसी आपात परिस्थितियों में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए वर्षों पहले उपनगरीय स्टेशनों पर ईएमआर शुरू करने का निर्णय लिया गया था।
वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है। मध्य रेलवे के करीब 90 उपनगरीय स्टेशनों में से केवल 5 से 6 स्टेशनों—जैसे घाटकोपर, भायखला, कल्याण और वाशी—पर ही ईएमआर सेवाएं चालू हैं। वहीं, पश्चिम रेलवे के 30 उपनगरीय स्टेशनों में से केवल 14 से 15 स्टेशनों पर ही इमरजेंसी मेडिकल रूम कार्यरत हैं।
रेलवे यात्री मामलों के जानकार और सामाजिक कार्यकर्ता समीर जवेरी ने करीब 15 वर्ष पहले मुंबई हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सभी रेलवे स्टेशनों पर ईएमआर शुरू करने की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने मुंबई के सभी रेलवे स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम शुरू करने का आदेश रेलवे प्रशासन को दिया था।
समीर जवेरी के अनुसार, शुरुआती दौर में रेलवे ने निजी मेडिकल संस्थाओं के सहयोग से कई स्टेशनों पर ईएमआर शुरू किए, जिससे यात्रियों को लाभ भी मिला। लेकिन समय के साथ इन सेवाओं की अनदेखी की गई और आज मध्य रेलवे पर ईएमआर की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।
हाल ही में मालाड रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में एक यात्री द्वारा दूसरे यात्री पर चाकू से हमला किए जाने की घटना का जिक्र करते हुए समीर जवेरी ने बताया कि घायल प्रो. सिंह की अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मौत हो गई। यदि स्टेशन पर इमरजेंसी मेडिकल रूम उपलब्ध होता, तो प्राथमिक उपचार देकर उन्हें तुरंत बड़े अस्पताल में रेफर किया जा सकता था और संभवतः उनकी जान बचाई जा सकती थी। ऐसे कई मामलों में ‘गोल्डन आवर’ में इलाज न मिलने से यात्रियों की जान चली जाती है।
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मुंबई के रेलवे स्टेशनों पर एम्बुलेंस सेवाओं की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। मध्य रेलवे के 90 स्टेशनों में से केवल 15 स्टेशनों पर ही 108 एम्बुलेंस उपलब्ध हैं, जबकि पश्चिम रेलवे के 29 स्टेशनों में से 24 स्टेशनों पर यह सुविधा मौजूद है। यह स्थिति केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि मुंबई लोकल से रोजाना यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के प्रति व्यवस्था की असंवेदनशीलता को दर्शाती है।
(इनपुटः सूर्यप्रकाश मिश्र, मुंबई)






