क्या सुनेत्रा पवार संभालेंगी NCP की कमान? विधायक प्रताप चिखलीकर के बयान से राज्य में सियासी हलचल तेज

NCP National President News: अजित पवार के निधन के बाद NCP में नेतृत्व को लेकर सुगबुगाहट तेज। विधायक प्रताप चिखलीकर ने सुनेत्रा पवार को पार्टी अध्यक्ष बनाने की मांग कर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
Pratap Chikhlikar On Sunetra Pawar
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार व एनसीपी विधायक प्रताप चिखलीकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Pratap Chikhlikar On Sunetra Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जारी शोक की लहर के बीच अब सत्ता और संगठन के भविष्य को लेकर बड़े संकेत मिलने लगे हैं। नांदेड़ जिले की लोहा विधानसभा सीट से विधायक प्रताप चिखलीकर ने मंगलवार को एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राज्य के सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

अजित पवार को अंतिम विदाई

बता दें कि 28 जनवरी को पुणे के बारामती में एक दुखद विमान दुर्घटना में अजित पवार का निधन हो गया था। इस अपूर्णीय क्षति के बाद पूरी पार्टी और पवार परिवार सदमे में है। मंगलवार को नांदेड़ में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अस्थियों के विसर्जन से पहले पत्रकारों से बात करते हुए विधायक चिखलीकर काफी भावुक नजर आए। विधायक चिखलीकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कार्यकर्ताओं की पुरजोर इच्छा है कि सुनेत्रा पवार अब पार्टी का नेतृत्व संभालें। उन्होंने कहा कि हमने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से अनुरोध किया है कि वे पार्टी प्रमुख का पद स्वीकार करें। कार्यकर्ताओं को लगता है कि इस कठिन समय में वही संगठन को एकजुट रख सकती हैं।

मुंबई की बैठक और वरिष्ठ नेताओं की सहमति

विधायक प्रताप चिखलीकर ने मुंबई में हुई एक हालिया उच्च स्तरीय बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस बैठक में प्रफुल्ल पटेल समेत पार्टी के कई दिग्गज नेता मौजूद थे। सभी का एकमत से यह मानना था कि संगठन की कमान सुनेत्रा पवार के हाथों में होनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि क्या सुनेत्रा पवार अधिकारिक तौर पर पार्टी अध्यक्ष का पद संभालती हैं और आगामी चुनावों में पार्टी को किस दिशा में ले जाती हैं।

जल्दबाजी में लिए गए फैसलों पर सफाई

अजित पवार के निधन के कुछ ही दिनों बाद सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किए जाने पर सोशल मीडिया और विपक्षी खेमे में सवाल उठ रहे थे। इस पर चिखलीकर ने बचाव करते हुए कहा कि यह सच है कि फैसला जल्दबाजी में लिया गया। लेकिन जब परिवार और राजनीतिक विरासत को संभालने की बात आती है, तो नेतृत्व किसी न किसी को सौंपना ही पड़ता है। सबकी भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने यह जिम्मेदारी स्वीकार की है।

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