'वॉटर इमरजेंसी' की ओर ऑरेंज सिटी, नागपुर में नलों से आ रही बीमारी! जानिए Smart City की कड़वी सच्चाई

Nagpur News: स्मार्ट सिटी का सपना देख रहा नागपुर आज गंभीर जल त्रासदी के मुहाने पर है। दूषित पेयजल, सीवर मिलावट और प्रशासन की चुप्पी ने पूरे शहर को मेडिकल इमरजेंसी की ओर धकेल दिया है।
Pune Equitable Water Supply Project
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Water Crisis: जिस नागपुर को हम 'स्मार्ट सिटी' बनाने का सपना देख रहे हैं, वह आज एक ऐसी त्रासदी की ओर बढ़ रहा है जिसे 'जल त्रासदी' कहना गलत नहीं होगा। शहर की सीवर लाइनें और नाले बदहाली के आंसू रो रहे हैं, लेकिन प्रशासन की खामोशी शहरवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। स्थिति इतनी विकट है कि अब डर सताने लगा है कि कहीं दूषित पानी के कारण नागपुर का हाल भी इंदौर जैसा भयावह न हो जाए। ऑरेंज सिटी के लिए 'स्मार्ट सिटी' का मुखौटा अब उतर चुका है। शहर के पांचों क्षेत्र (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य नागपुर) इस समय दूषित पानी की मार झेल रहे हैं। प्रशासन की अक्षमता ने शहर के हर घर में 'बीमारियों का जल' पहुंचा दिया है।

कहां क्या है संकट

क्षेत्र प्रमुख समस्या स्थिति
उत्तर नागपुर सीवर और पेयजल लाइनों का मिलन बस्तियों में पीला व बदबूदार पानी, पीलिया का प्रकोप
पूर्व नागपुर कन्हान नदी की राख और जलजमाव फ्लाई ऐश मिला पानी पीने से किडनी व पेट की गंभीर बीमारियां
मध्य नागपुर पुरानी और जर्जर पाइपलाइनें ड्रेनेज का पानी नलों में मिल रहा, गैस्ट्रो के मरीज बढ़े
दक्षिण नागपुर प्रदूषित भूजल बोरवेल व कुओं का पानी जहरीला, त्वचा रोगों का संकट
पश्चिम नागपुर अंबाझरी झील का दूषित जल पॉश इलाकों में भी गंदे पानी की सप्लाई, प्रशासन की चुप्पी

गरीबों की जान सस्ती

सबसे भयावह स्थिति स्लम बस्तियों की है। यहां जहां नालियां चोक हैं वहीं गंदगी पेयजल स्रोतों में समा रही है। बस्तियों के छोटे बच्चों में डायरिया, टाइफाइड और हैजा की शिकायतें हर दूसरे घर में मिल रही हैं। गरीब जनता निजी अस्पतालों का खर्च उठाने में अक्षम है और सरकारी अस्पतालों में दूषित पानी के मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं।

भविष्य की विकलांगता

कन्हान नदी में बिजली घरों की राख का मिलना एक आपराधिक कृत्य है। हाई कोर्ट के जुर्माने के बावजूद सुधार न होना प्रशासन की बेशर्मी की पराकाष्ठा है। यह राख केवल पानी को गंदा नहीं करती, बल्कि इसमें मौजूद भारी धातुएं आने वाली पीढ़ी को शारीरिक रूप से अपंग बना सकती हैं।

प्रशासन की 'अपराधिक' खामोशी

नीरी: वैज्ञानिक रिपोर्ट 5 वर्ष पहले दी गई। इसके बाद नीरी असली स्थिति से या तो अनभिज्ञ है या फिर उन्हें जानबूझ कर रिपोर्ट जारी करने नहीं दिया जा रहा है। मनपा: सीवर और नाले सुधारने के नाम पर करोड़ों के टेंडर कहां गए? जब विधायक खुद अंबाझरी तालाब को दूषित बता रहे हैं, तो आयुक्त चुप क्यों हैं? अंबाझरी का सच: शहर के फेफड़े कहे जाने वाले इस तालाब का पानी ज़हरीला होना नागपुर के पतन की निशानी है।

महामारी के मुहाने पर नागपुर

नागपुर आज इंदौर जैसी त्रासदी के कगार पर खड़ा है। अगर आज पांचों दिशाओं के नागरिक एक साथ नहीं जागे, तो कल नागपुर की हर गली में एम्बुलेंस का सायरन गूंजेगा। यह केवल दूषित पानी नहीं, प्रशासन द्वारा किया जा रहा सामूहिक स्वास्थ्य समझौता है। नागपुर में जल संकट अब केवल पानी की कमी का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह एक 'मेडिकल इमरजेंसी' की ओर बढ़ता खतरा है। शहर के सीवर और पेयजल की पाइपलाइनें कई जगहों पर एक-दूसरे में मिल चुकी हैं, जिससे लोगों के घरों में नलों से बदबूदार और पीला पानी आ रहा है। प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा अब शहर के अस्पतालों में उमड़ रही भीड़ के रूप में सामने आ रहा है।

हाई कोर्ट की फटकार का भी असर नहीं

हाई कोर्ट ने कन्हान नदी में राख मिलने पर सख्त रुख अपनाते हुए भारी जुर्माना लगाया है, लेकिन ऐसा लगता है कि प्रशासन ने इसे 'व्यापारिक घाटा' मानकर स्वीकार कर लिया है। सुधार की नीयत कहीं नजर नहीं आती।

नीरी और मनपा की 'साठगांठ' पर सवाल

आखिर नीरी जैसी राष्ट्रीय स्तर की संस्था की रिपोर्टिंग क्यों रुक गई है? क्या प्रशासन अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए आंकड़ों का खेल खेल रहा है? महानगर पालिका की चुप्पी इस बात की तस्दीक करती है कि उसके पास इस संकट का कोई समाधान नहीं है या फिर वे जनता की जान की कीमत पर चुप्पी साधे बैठे हैं।

विधायक ने उठाए सवाल

सिर्फ नदियां ही नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक विरासत और जल स्रोत अंबाझरी तालाब भी अब सुरक्षित नहीं रहा। खुद विधायक परिणय फुके ने इसके दूषित होने की पुष्टि की है। जब शहर के मुख्य जल स्रोत ही प्रदूषित हो चुके हों, तो नागपुर के लोग आखिर किस पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं? बोरिंग और कुओं का पानी पहले ही अनुपयोगी घोषित हो चुका है।

हमारा सवाल

  • अगर हाई कोर्ट के दंड के बावजूद कन्हान नदी में राख मिलना बंद नहीं हो रहा, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा क्यों नहीं?
  • नीरी और मनपा जनता से क्या छुपा रही हैं?
  • क्या नागपुर के करदाताओं को साफ पानी पाने का भी हक नहीं है?
  • प्रशासन जागे, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।
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