मनोज जरांगे (pic credit; social media)
Maharashtra News: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल का आंदोलन शनिवार को भी मुंबई के आजाद मैदान में जारी रहा। अपने समर्थकों के साथ आमरण अनशन पर बैठे जरांगे ने साफ कहा कि जब तक पूरे मराठा समाज को कुणबी घोषित नहीं किया जाता, तब तक वे यहां से हटने वाले नहीं हैं।
जरांगे ने सवाल उठाया कि मराठवाड़ा के 1 लाख 23 हजार कुनबी आखिर कहां गए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिंदे समिति ने 13 महीने तक अध्ययन किया, लेकिन नतीजा सामने नहीं आया। जरांगे ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि रविवार सुबह तक सरकार उनके हाथ में सभी मराठों को कुणबी घोषित करने का प्रमाणपत्र सौंपे। उन्होंने साफ कहा, “अब आश्वासन नहीं, रिजल्ट चाहिए।”
इस बीच, एनसीपी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे का हल निकालने के लिए संविधान में संशोधन जरूरी है। उन्होंने चिंता जताई कि इस विवाद से समाज में दरार और अशांति बढ़ रही है।
इधर, सेवानिवृत न्यायमूर्ति सदीप शिंदे और कुछ सरकारी अधिकारी शनिवार को सरकार के दूत बनकर जरांगे से मिलने पहुंचे। उन्होंने जानकारी दी कि 24 जून 2023 से अब तक राज्यभर में 10 लाख 35 हजार कुनबी प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं और समिति जातीय अभिलेखों की गहन जांच कर रही है। समिति ने और समय मांगा, लेकिन जरांगे ने इसे सख्ती से ठुकरा दिया।
कैबिनेट मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने भी स्पष्ट कहा कि जरांगे की सभी मांगें पूरी कर पाना बेहद मुश्किल है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान जिनकी मौत हुई है, उनके परिवारों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दोहराया कि सरकार मराठा आरक्षण की मांगों को संवैधानिक और कानूनी ढांचे के तहत पूरा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग मानते हुए 10 प्रतिशत आरक्षण पहले से लागू है। इसके अलावा, मराठा युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए सरकार ने 1.5 लाख उद्यमियों को तैयार किया है।