
agricultural land takeover (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bombay High Court verdict: अंबरनाथ सहकारी कृषि समिति, जिसे फार्मिंग सोसायटी के नाम से जाना जाता है, को राज्य सरकार ने वर्ष 1963 में खेती, वृक्षारोपण और उसके संवर्धन के उद्देश्य से लगभग 210 एकड़ जमीन निःशुल्क दी थी। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह भूमि अब राज्य सरकार को वापस सौंपी जाएगी।
राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने संस्था की अपील खारिज कर दी और भूमि अधिग्रहण के सरकारी निर्णय को बरकरार रखा। इस भूमि का अधिकांश हिस्सा सरकारी मेडिकल कॉलेज भवन के निर्माण में उपयोग किया जाएगा।
न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और आरती साठे की खंडपीठ ने 28 जनवरी 2026 को दिए अपने फैसले में कहा कि कृषि के लिए दी गई सरकारी भूमि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ है। न्यायालय ने माना कि संस्था ने अनुदान की शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया है।
अदालत के समक्ष प्रस्तुत निरीक्षण रिपोर्ट में पाया गया कि केवल 7.68 हेक्टेयर (लगभग 19 एकड़) भूमि पर ही वृक्षारोपण किया गया था। शेष भूमि पर बड़ी संख्या में अवैध मकान, चॉल, दुकानें, शेड, फार्महाउस तथा लगभग 400 से 500 अतिक्रमण मौजूद हैं। कृषि गतिविधियाँ लगभग पूरी तरह से बंद पाई गईं। जांच में यह भी सामने आया कि संस्था ने मूल किसान सदस्यों को दरकिनार कर गैर-किसान और संपन्न व्यक्तियों को सदस्य बनाया, जो अनुदान की शर्तों के खिलाफ है।
संस्था ने अदालत में दावा किया कि अधिकांश भूमि पर खेती की जाती रही है। कुछ हिस्से पथरीले और नालों से प्रभावित होने के कारण खेती योग्य नहीं थे, जहां सागौन, काजू और नारियल के पेड़ लगाए गए। संस्था का यह भी कहना था कि 1987 का कारण बताओ नोटिस केवल 97 एकड़ भूमि के लिए था, इसलिए पूरी 210 एकड़ भूमि को जब्त करना अनुचित है।
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने दलील दी कि भूमि केवल कृषि प्रयोजन के लिए दी गई थी, जबकि वास्तविकता में इसका व्यावसायिक उपयोग किया गया। सरकारी भूमि पर अवैध निर्माणों को बढ़ावा दिया गया और यह भूमि शहर के मध्य स्थित होने के कारण सार्वजनिक उपयोग के लिए आवश्यक है।
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उच्च न्यायालय ने कहा कि सरकारी सहायता से प्राप्त भूमि का उपयोग अचल संपत्ति के रूप में करना अस्वीकार्य है। ऐसे दुरुपयोग को कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता। अदालत ने संगठन की याचिका खारिज करते हुए सरकार को सभी अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई की स्वतंत्रता भी प्रदान की।
अंबरनाथ तहसीलदार अमित पुरी ने कहा कि“उच्च न्यायालय ने सरकार को संपूर्ण 210 एकड़ भूमि पर कब्जा लेने का आदेश दिया है। तीन महीने के भीतर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।”
अंबरनाथ शेतकी सहकारी सोसायटी के सचिव दीपक पवार ने कहा कि “हमें निर्णय की जानकारी मिली है, लेकिन अभी पूर्ण आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश मिलने के बाद हम उचित रुख तय करेंगे।”
(इनपुट: कमर काजी)






