
MBMC Politics 2026 (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mira Bhayandar Municipal Corporation: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। करीब तीन वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 2026 में संपन्न हुए महानगरपालिका चुनावों ने शहर की राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल दी है। अब सभी की निगाहें महापौर पद के चुनाव पर टिकी हैं, जो 3 फरवरी को होने जा रहा है।
हाल ही में हुए मनपा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 78 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। वहीं कांग्रेस को 13 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। शिवसेना की स्थिति कमजोर रही, लेकिन तीन नगरसेविकाओं की जीत ने पार्टी की राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखी है। चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस और शिवसेना ने मीरा-भाईंदर शहर में ‘विकास आघाड़ी’ बनाकर सत्ताधारी भाजपा को घेरने की रणनीति अपनाई है।
महापौर पद के लिए शुक्रवार, 30 जनवरी को नामांकन प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जबकि 3 फरवरी को मतदान और परिणाम घोषित होंगे। ऐसे में आने वाले कुछ दिन मीरा-भाईंदर की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
महापौर चुनाव से पहले मराठी भाषी महापौर की मांग ने जोर पकड़ लिया है। मराठी एकीकरण समिति, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट की शिवसेना इस मांग को लेकर लगातार दबाव बना रही हैं। इससे चुनावी समीकरण और अधिक जटिल होते नजर आ रहे हैं।

महापौर पद के लिए जिन नामों की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, उनमें पूर्व महापौर डिंपल मेहता, नगरसेविकाएं अनिता पाटिल, वंदना मंगेश पाटिल, शानू गोयल, रूपाली मोदी शिंदे, नीला सोंस, नयना म्हात्रे और दीपिका अरोरा शामिल हैं। हालांकि, पार्टी की संसदीय समिति किस नाम पर अंतिम मुहर लगाएगी, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। साथ ही भाजपा की अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए विधायक नरेंद्र मेहता की भूमिका भी काफी अहम मानी जा रही है।
उपमहापौर पद के लिए ध्रुवकिशोर पाटिल, प्रशांत दलवी, मदन सिंह, रवि व्यास और भगवती शर्मा के नाम सामने आ रहे हैं। भाजपा के स्पष्ट बहुमत को देखते हुए इन पदों पर भी रोचक मुकाबला देखने को मिल सकता है।
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महापौर चुनाव से पहले मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के सदन की मरम्मत और सुशोभीकरण का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। नए कार्यकाल की शुरुआत को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा अपने बहुमत के दम पर किसे महापौर बनाएगी और मराठी महापौर की मांग चुनावी फैसले को कितना प्रभावित करेगी। इन सभी सवालों के जवाब 3 फरवरी को मिलेंगे, जब मीरा-भाईंदर को उसका नया महापौर मिलेगा।
(इनपुटः विनोद मिश्रा)






