
Group Leader Selection (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Municipal Corporation: नासिक महानगरपालिका में महापौर और उपमहापौर का चुनाव 6 फरवरी को होने जा रहा है। इससे पहले ही सभी राजनीतिक दलों ने सदन में अपनी ताकत को संगठित करने के उद्देश्य से समूहनेता पद के चयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। महापौर चुनाव की पृष्ठभूमि में दलों ने सदन में आक्रामक, अनुभवी और अध्ययनशील नेतृत्व खड़ा करने पर विशेष जोर दिया है। कुछ दलों ने अपने समूहनेताओं की आधिकारिक घोषणा कर दी है, जबकि कुछ जगहों पर अंतिम चरण की चर्चाएं जारी हैं।
अब तक भाजपा ने एडवोकेट शाम बडोदे, शिवसेना (ठाकरे गुट) ने केशव पोरजे और कांग्रेस ने सूफी जीन को समूहनेता नियुक्त किया है। वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) ने संयुक्त मोर्चे के रूप में समूह पंजीकरण की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। सूत्रों के अनुसार, इस आघाड़ी के समूहनेता पद के लिए अजय बोरस्ते का नाम लगभग तय माना जा रहा है। महानगरपालिका चुनाव में कुल 122 सीटों में से भाजपा के 72 पार्षद निर्वाचित हुए हैं, जिससे सत्ता स्थापना के लिए पार्टी का संख्याबल मजबूत स्थिति में है।
इसके बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के 26, शिवसेना (ठाकरे गुट) के 15, राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) के 4, कांग्रेस के 3, मनसे का 1 और एक निर्दलीय सदस्य सदन में शामिल है। हालांकि भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, फिर भी विपक्षी दलों ने सदन में प्रभावी और मजबूत भूमिका निभाने के लिए अनुभवी पार्षदों को समूहनेता बनाए जाने को प्राथमिकता दी है। प्रशासन से जवाबदेही तय करना, महत्वपूर्ण मुद्दों पर सत्ताधारी पक्ष को घेरना और नागरिकों की समस्याओं को मजबूती से सदन में उठाना। इन्हीं मानकों के आधार पर समूहनेताओं का चयन किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ये भी पढ़े: “एक युग का अंत” अजितदादा पवार पर विधायक सतीश चव्हाण का बड़ा बयान, राजनीति में शोक
समूहनेता केवल एक पद नहीं, बल्कि सदन की राजनीतिक दिशा तय करने वाला प्रमुख चेहरा होता है। स्थायी समिति, विषय समितियों, बजट चर्चा, विकास कार्यों पर आपत्तियां और प्रशासन पर निगरानी रखने में समूहनेताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी कारण इस बार सभी दलों ने अनुभव के साथ-साथ आक्रामकता और प्रभावी प्रस्तुति क्षमता को भी प्राथमिकता दी है।
महापौर और उपमहापौर चुनाव के बाद सदन के समीकरण और स्पष्ट होंगे, लेकिन उससे पहले ही समूहनेताओं की नियुक्ति से राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है। आने वाले अधिवेशन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी और रोचक बहस देखने को मिलने की पूरी संभावना है।






