

BMC Mahayuti 100 Days Report Card: मुंबई महानगरपालिका (BMC) में प्रशासनिक सुधारों और वित्तीय शुचिता को लेकर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। लेकिन महायुति सरकार ने अपने शुरुआती 100 दिनों के भीतर ही यह साफ कर दिया है कि अब नगर निगम में जनहित के पैसों की फिजूलखर्ची और भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस और सख्त ऑडिटिंग का सहारा लेकर बीएमसी के भीतर ठेकेदारों के उस दशकों पुराने एकाधिकार को तोड़ दिया है, जो मनमाने दामों पर टेंडर हासिल कर प्रशासनिक खजाने को चूना लगाते थे।
इस 100-दिवसीय अभियान के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और नगर निगम प्रशासन ने बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure) और शहर की स्वच्छता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा। व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए बीएमसी पार्षदों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया, ताकि वे अपने वार्डों में विकास कार्यों की गुणवत्ता और बजट पर पैनी नजर रख सकें। इस नई कार्यप्रणाली के लागू होने से जहां एक तरफ कार्य संस्कृति बदली है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के आरोपों की धार भी कुंद हुई है।
महायुति सरकार के इस रिपोर्ट कार्ड में सबसे प्रमुख उपलब्धि उन चार टेंडरों को रद्द करना रही, जिनकी लागत को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर (Inflated) आंका गया था:
रानीबाग चिड़ियाघर विस्तार: भायखला स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान (चिड़ियाघर) के विस्तार के लिए प्रस्तावित ₹490 करोड़ का भारी-भरकम टेंडर रद्द किया गया।
फुटपाथ रेलिंग परियोजना: शहर के फुटपाथों पर लोहे की रेलिंग लगाने के लिए जारी ₹385 करोड़ का टेंडर भारी अनियमितताओं के शक में जारी होने के महज 24 घंटे के भीतर रोक दिया गया।
रोड पेंटिंग प्रोजेक्ट: मुंबई की सड़कों के सौंदर्यीकरण और पेंटिंग के लिए निकाला गया ₹150 करोड़ का टेंडर भी निरस्त सूची में शामिल है।
स्कूल स्टेशनरी खरीद: नगर निगम के स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों की स्टेशनरी और कॉपियों की खरीद के लिए प्रस्तावित ₹150 करोड़ के टेंडर को भी रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी प्रक्रिया शुरू की गई है।
हालांकि, महायुति गठबंधन के लिए बीएमसी में इन 100 दिनों का यह सफर इतना आसान भी नहीं रहा। अपनी पहली पारी के दौरान सत्ताधारी गठबंधन को बीएमसी हाउस के पटल पर विपक्ष के भारी हंगामे और तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को पास कराने के दौरान गठबंधन के भीतर भी मामूली आंतरिक खींचतान और असंतोष की खबरें सामने आईं। इसके बावजूद, सरकार 21-सूत्रीय एजेंडे के सहारे प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाने में सफल रही, जिसे नागरिक प्रशासन की एक बड़ी जीत माना जा रहा है।