

MP Congress Attacks BJP: मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मंत्रियों के "परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड" और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की वन-टू-वन समीक्षा बैठकों के बीच राज्य की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। सत्ता और संगठन की हालिया मैराथन बैठक के भीतर की बातें बाहर आने के बाद, अब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने एक कथित आंतरिक बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखा तंज कसते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने बीजेपी की अंदरूनी बैठक का हवाला देते हुए एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि आलीराजपुर की समीक्षा के दौरान जिला प्रभारी मंत्री संपत्तिया उइके ने अपनी ही सरकार के कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान पर गंभीर टिप्पणी की। कथित तौर पर उइके ने कहा, "नागर सिंह का तो शराब कारोबार है... उनसे समन्वय कैसा?" इस बयान पर तंज कसते हुए उमंग सिंगार ने कहा कि बीजेपी के मंत्री अब बंद कमरों से निकलकर एक-दूसरे पर सरेआम शराब कारोबार से जुड़े होने के आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष ने इसे ही मंत्रियों का असली “परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड” करार दिया है। कांग्रेस अब इस मुद्दे को लेकर कैबिनेट मंत्रियों के बीच आपसी खींचतान और भ्रष्टाचार के आरोपों पर सरकार को चौतरफा घेरने की रणनीति बना रही है।
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी सत्ता-संगठन की करीब नौ घंटे चली लंबी बैठक में कई जिलों के भीतर नेताओं के बीच तालमेल की भारी कमी उजागर हुई है।
सागर जिले की समीक्षा के दौरान यह बात उठी कि वहाँ गोपाल भार्गव (9 बार के विधायक) और भूपेंद्र सिंह (6 बार के विधायक) जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद हैं, ऐसे में स्थानीय स्तर पर समन्वय बिठाना आसान काम नहीं है। हालांकि, संगठन ने यह भी माना कि चुनाव में सभी जीत जाएंगे।
दमोह जिले को लेकर वरिष्ठ नेता जयंत मलैया की उम्र पर चर्चा हुई। संगठन ने संकेत दिए हैं कि उनके बेटे सिद्धार्थ मलैया जमीन पर सक्रिय हैं, इसलिए आगामी समय में उनके नाम पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा रीवा जिले में भी नेताओं के बीच समन्वय की कमी पाई गई।
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने मंत्रियों के कामकाज को लेकर बेहद कड़े तेवर दिखाए। मंत्रियों से सीधे सवाल किए गए कि:
इस मैराथन बैठक में पूरा फोकस वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में हारी हुई सीटों, स्थानीय संगठन की स्थिति और आगामी नगरीय निकाय चुनावों की रणनीति पर रहा। राजनीतिक और संगठनात्मक फीडबैक में ज्यादा समय लगने के कारण मंत्रियों के विभागों की विस्तृत समीक्षा नहीं हो सकी। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 मई से विभागवार समीक्षा बैठकें शुरू करेंगे, जहां मंत्रियों के कामकाज का अंतिम रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा।
वहीं, राजनीतिक गलियारों में चल रही मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों पर विराम लगाते हुए बीजेपी नेता हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार की कोई संभावना नहीं है।