
BJP Internal Conflict:मीरा-भाईंदर मनपा चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mira Bhayandar Municipal Election: मीरा-भाईंदर की राजनीति इस समय अभूतपूर्व उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। मनपा चुनावों से ठीक पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अपने ही नेताओं की बगावत ने कठघरे में खड़ा कर दिया है। टिकट वितरण को लेकर उपजे असंतोष ने ऐसा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है कि पार्टी अनुशासन, संगठनात्मक एकता और चुनावी गणित तीनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पार्टी नेतृत्व की तमाम कोशिशों, मान-मनौव्वल और अनुशासनात्मक कार्रवाई के बावजूद बागी नेता पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। नतीजतन, कई प्रभागों में चुनावी मुकाबला अब पार्टी बनाम पार्टी के अपने नेता जैसा बनता जा रहा है। टिकट वितरण के बाद भाजपा में सबसे अधिक असंतोष देखने को मिला है। कई वरिष्ठ नेताओं, पूर्व पार्षदों और पदाधिकारियों का आरोप है कि वर्षों की मेहनत और मजबूत जमीनी पकड़ के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया। इसी नाराजगी ने कई जगहों पर खुली बगावत का रूप ले लिया है।
प्रभाग 23 से पूर्व पार्षद विनोद म्हात्रे, प्रभाग 2 से यशवंत कांगणे और उनकी पत्नी व पूर्व पार्षद मीना कांगणे, भाजपा पदाधिकारी शिखा भाटेवाड़ा और अभिषेक भाटेवाड़ा ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ मैदान में उतरने की घोषणा की है। वहीं प्रभाग 4 में पूर्व वरिष्ठ पार्षद प्रभात पाटिल, उनके पुत्र पीयूष पाटिल और पूर्व पार्षद गणेश भोइर ने भी पार्टी लाइन से हटकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
इसके अलावा प्रभाग 5 से पूर्व पार्षद डॉ. प्रीति पाटिल, प्रभाग 14 से अनिल भोसले, प्रभाग 18 से पूर्व पार्षद दौलत गजरे और पदाधिकारी प्रो. सुनील धापसे, प्रभाग 1 से पूर्व पार्षद रीटा शाह तथा प्रभाग 7 से रक्षा भूपतानी भी भाजपा के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं। इन बागी उम्मीदवारों का कहना है कि स्थानीय नेतृत्व ने टिकट वितरण में मनमानी की और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की। वहीं भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पार्टी अनुशासन से गद्दारी करने वालों को टिकट नहीं दिया गया।
स्थिति को संभालने के लिए भाजपा नेतृत्व ने बागी उम्मीदवारों को मनाने के प्रयास किए। कुछ असंतुष्टों को नई जिम्मेदारियां देकर मना लिया गया। पूर्व पार्षद डॉ. सुशील अग्रवाल, एड. राजकुमार मिश्रा, स्वामी विजय कुमार, रोहित गुप्ता, दीपाली मोकाशी, श्रद्धा बने और शैलेश मामुनकर सहित कुछ नेताओं ने अपने नामांकन वापस ले लिए हैं। हालांकि, इसके बावजूद कई बागी नेताओं ने नामांकन वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि वे पार्टी नहीं, बल्कि जनता के भरोसे चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़ी संख्या में बागी उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से भाजपा के अधिकृत उम्मीदवारों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
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पूर्व पार्षदों की नाराजगी और बगावत के बीच भाजपा ने इस बार 13 नए शिक्षित युवाओं को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा है। इनमें प्रभाग 1 से मानसी शर्मा (बीएससी नर्सिंग) और पंकज पांडे (स्नातक), प्रभाग 3 से एड. तरुण शर्मा (वकील) और दिव्या प्रसाद परब (स्नातक), प्रभाग 5 से प्रियंका करनी चरण (एम.कॉम, बी.एड.), प्रभाग 7 से डॉ. भाव्या पिपलिया (चिकित्सक), प्रभाग 8 से किमया रकवी (मास्टर इन इंजीनियरिंग मैनेजमेंट), प्रभाग 10 से महेश म्हात्रे (व्यवसायी) और आकांक्षा विरकर (स्नातक, फैशन डिजाइनर), प्रभाग 11 से विशाल पाटील (व्यवसायी), प्रभाग 15 से मानसी पाटील (आईटी इंजीनियर), प्रभाग 18 से एड. मयूरी म्हात्रे (वकील) और विवेक उपाध्याय शामिल हैं।
भाजपा युवामोर्चा के जिला अध्यक्ष रणवीर वाजपेयी ने बताया कि उन्होंने 23 युवाओं के लिए टिकट की मांग की थी, जिनमें से 13 को मौका मिला है। उन्होंने खुशी जताई कि पहली बार मनपा चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में युवा नेतृत्व को प्रतिनिधित्व दिया गया है।






