
राहुल नार्वेकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Colaba Nomination Controversy: आगामी बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले कोलाबा क्षेत्र में नामांकन प्रक्रिया को लेकर उठा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। जनता दल (सेक्युलर) ने अपनी शिकायत वापस ले ली है, हालांकि विपक्ष के आरोप अभी थमे नहीं हैं।
जनता दल (सेक्युलर) ने बीएमसी चुनाव के लिए कोलाबा इलाके में नामांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर दर्ज कराई गई अपनी शिकायत वापस ले ली है। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। उनके अनुसार, पार्टी ने यह कदम तब उठाया जब उसके तीन में से दो उम्मीदवारों के नामांकन स्वीकार कर लिए गए।
हालांकि इस मामले में नया मोड़ तब आया जब जद(एस) के पूर्व सांसद हरिभाऊ राठौड़ ने स्पष्ट किया कि वह विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के खिलाफ अपनी व्यक्तिगत शिकायत वापस नहीं लेंगे। राठौड़ का कहना है कि उनकी शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग के पास अब भी लंबित है और वे इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
विपक्षी दलों ने राहुल नार्वेकर पर नगर निगम चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन, नामांकन प्रक्रिया में हस्तक्षेप और सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपों के मुताबिक, कुछ उम्मीदवारों को जानबूझकर नामांकन दाखिल करने से रोका गया, ताकि कुछ प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत सुनिश्चित की जा सके।
यह विवाद कोलाबा विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 225, 226 और 227 से जुड़ा है, जहां राहुल नार्वेकर के करीबी रिश्तेदार चुनाव मैदान में हैं। उनके भाई मकरंद नार्वेकर, बहन गौरी शिवालकर और भाभी हर्षिता शिवालकर इन वार्डों से उम्मीदवार हैं। विपक्ष का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया को इन उम्मीदवारों के पक्ष में मोड़ा गया।
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इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल नार्वेकर ने सभी दावों को “निराधार” और “राजनीति से प्रेरित” बताया। उन्होंने कहा कि जद(एस) को अपने उम्मीदवारों के नामांकन की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं थी और पार्टी ने बेवजह शिकायत कर एक झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की।
पूर्व सांसद हरिभाऊ राठौड़ ने यह भी आरोप लगाया कि 30 दिसंबर को नार्वेकर शाम पांच बजे तक निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में मौजूद रहे और नामांकन प्रक्रिया को धीमा करने के निर्देश दिए गए। हालांकि इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बीएमसी चुनाव से पहले यह मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।






