
camel seizure (सोर्सः सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar: बॉम्बे उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ ने पुलिस को 32 ऊंटों का कब्जा पशुपालक रबारी समुदाय को सौंपने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति मेहरोज पठान ने याचिका के अंतिम निर्णय तक राजस्थान के महावीर अभयारण्य को ऊंटों के ताबे या छोड़ने में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया है।
जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में गुजरात से अमरावती की ओर 32 नर ऊंट ले जाए जा रहे थे। इस दौरान नंदुरबार जिले के शहादा में ऊंटों को कथित रूप से वध के लिए ले जाने का आरोप लगाकर ऊंट पालकों के खिलाफ गलत तरीके से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। शिकायत गैर जमानती होने के बावजूद लंबी कानूनी प्रक्रिया में ऊंटों का कब्जा बरकरार रहा और उन्हें एक सामान्य गोशाला में रखा गया।
पशुपालक मंगल रबारी ने ऊंटों की उचित देखभाल के लिए उन्हें राजस्थान के सिरोही जिले के पालड़ी स्थित महावीर अभयारण्य में भेजने की अनुमति मांगी थी। शहादा के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 12 जनवरी 2026 को ऊंटों को छोड़ने का आदेश दिया था, लेकिन बाद में उस आदेश पर स्थगन लगा दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और 20 एवं 23 जनवरी 2026 को दिए गए आदेशों के चलते ऊंटों को छोड़ने पर रोक लगी रही।
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उच्च न्यायालय ने मजिस्ट्रेट के आदेश को पुनर्जीवित करते हुए लागू किया और अब जेएमएफसी के आदेशानुसार ऊंटों का कब्जा रबारी समुदाय को सौंपा जाएगा। प्रकरण में एडवोकेट निरंजन देशपांडे ने प्रो-बोनो याचिका के माध्यम से रबारी और अन्य घुमंतू पशुपालक समुदायों के पारंपरिक प्रवास और ऊंट पालन के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की थी। इस फैसले को ऊंटों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






