
Nagpur Crime News: नागपुर जिला एवं सत्र न्यायालय ने 45 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए अविनाश सगदेव को दोषी ठहराते हुए 1 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने 60 लाख रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति अदा करने का भी आदेश दिया। यह फैसला अपर मुख्य न्यायदंडाधिकारी महेश फाड़े ने सुनाया। इस मामले में वर्ष 2022 में शिकायत दर्ज की गई थी।
शिकायतकर्ता अमर कटारिया के अनुसार वर्ष 2017 में उनकी मुलाकात आरोपी सगदेव से एक निवेश के सिलसिले में हुई थी। सगदेव और उनके परिवार ने दावा किया था कि मौजा कान्होली स्थित कृषि भूमि को आवासीय लेआउट में परिवर्तित करने के लिए धन की आवश्यकता है। इस पर कटारिया ने 15 लाख रुपये का निवेश किया, जिसमें उनकी पत्नी द्वारा बेटे की उच्च शिक्षा के लिए बचाए गए पैसे भी शामिल थे।
आरोपी ने अधिक मुनाफे का आश्वासन देते हुए 1,875 वर्ग फुट का एक प्लॉट गिरवी रखा था और 12 माह के भीतर रकम लौटाने का वादा किया था। तय अवधि बीतने के बाद भी पैसे वापस नहीं किए गए। वर्ष 2020 में आरोपी के परिवार ने जमीन का एक हिस्सा 1.15 करोड़ रुपये में बेच दिया। इसके बाद भी जब रकम नहीं मिली तो कटारिया ने लगातार दबाव बनाया।
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आखिरकार आरोपी ने 5 मार्च, 2022 को 45 लाख रुपये का चेक दिया, जिसमें मूल राशि, लाभ और देरी के मुआवजे की रकम शामिल थी लेकिन खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद कटारिया ने कानूनी कार्रवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान आरोपी ने कहा कि चेक उसके घर से चोरी हो गया, तो कभी यह दावा किया कि चेक उसके कार्यालय से जबरन लिया गया।
नागपुर अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि आरोपी ने न तो चोरी या जबरदस्ती की कोई पुलिस शिकायत दर्ज कराई, न ही बैंक को पेमेंट रोकने के निर्देश दिए। इसके अलावा उसने शिकायतकर्ता की कानूनी नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया। अदालत ने इन दलीलों को मनगढ़ंत और अविश्वसनीय बताते हुए आरोपी को दोषी करार दिया।






