
Wainganga Nalganga River Link (Source. Pinterest)
Wainganga Nalganga River: अकोला विदर्भ के सिंचाई सुविधाओं से वंचित जिलों का संपूर्ण परिदृश्य बदलने की क्षमता रखने वाली महत्वाकांक्षी वैनगंगा-नलगंगा नदी जोड़ परियोजना विभिन्न मंजूरी प्रक्रियाओं के अंतिम चरण में है। विदर्भ सिंचाई विकास महामंडल के अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया है कि इस वर्ष के भीतर सभी मंजूरियां पूरी कर परियोजना का काम प्रत्यक्ष रूप से शुरू हो जाएगा।
इस परियोजना को वर्ष 2024 में राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी। लगभग 94,912 करोड़ रु। लागत का विस्तृत परियोजना अहवाल मेसर्स सिएन्सीस टेक लि। ने तैयार किया है, जो सरकार की प्रशासकीय मंजूरी प्रक्रिया में है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे प्राथमिकता पर रखा है और समय-समय पर इसकी समीक्षा की जा रही है। आने वाले महीनों में वन विभाग और पर्यावरण की मंजूरी के साथ विस्तृत प्रस्ताव केंद्रीय जल आयोग को भेजा जाएगा।
वैनगंगा नदी पर स्थित गोसेखुर्द (इंदिरा सागर) राष्ट्रीय प्रकल्प से तापी उप-खोरे की नलगंगा नदी परियोजना में लगभग 1,804 दलघमी पानी मोड़ा जाएगा। इससे भंडारा, नागपुर, वर्धा, अमरावती, यवतमाल, अकोला, वाशिम और बुलढाना इन आठ जिलों के लगभग 4 लाख 4 हजार 281 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचाई के अंतर्गत आएगा। साथ ही औद्योगिक और घरेलू जल उपयोग की सुविधाएं भी बड़े पैमाने पर उपलब्ध होंगी।बनेगी 388.28 किमी लंबी नदी जोड़ नहर
पानी मोड़ने के लिए 388.28 किमी लंबी नदी जोड़ नहर बनाई जाएगी। इसमें 13 सुरंगें (कुल लंबाई 23.77 किमी) और लगभग 292 किमी खुली नहर शामिल होगी। आठ स्थानों पर पंपों की मदद से पानी उठाना पड़ेगा। नाशिक जल विज्ञान परियोजना द्वारा किए गए अध्ययन में यह योजना किफायती और व्यवहार्य साबित हुई है।
| विशेषता | विवरण |
| कुल लागत | ₹94,912 करोड़ (लगभग) |
| नहर की लंबाई | 388.28 किमी |
| लाभान्वित जिले | 8 (भंडारा, नागपुर, वर्धा, अमरावती, यवतमाल, अकोला, वाशिम, बुलढाना) |
| सिंचाई क्षमता | 4,04,281 हेक्टेयर |
| जल भंडारण | 50 तालाब (32 नए, 18 मौजूदा) |
इस परियोजना में 50 भंडारण तालाबों की व्यवस्था की गई है, जिनमें से 18 पहले से मौजूद हैं। इनमें से 10 की ऊंचाई बढ़ाई जाएगी और शेष 32 नए बनाए जाएंगे। इसके अलावा निम्न वर्धा, काटेपूर्णा और नलगंगा परियोजनाओं के जलाशयों का भी उपयोग किया जाएगा।
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मुख्य नहर क्षेत्र के गांवों, शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार 80 दलघमी घरेलू उपयोग और 139 दलघमी औद्योगिक उपयोग की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि सब कुछ नियोजनानुसार हुआ तो इस वर्ष के भीतर ही परियोजना का प्रत्यक्ष काम शुरू हो जाएगा और विदर्भ के सिंचन परिदृश्य में ऐतिहासिक परिवर्तन होगा।






