
अल फलाह यूनिवर्सिटी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Jawad Ahmed Siddiqui Arrested: हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई करते हुए यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर करोड़ों के मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी मॉड्यूल से जुड़े होने के गंभीर आरोप हैं।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सिद्दीकी को चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस मामले में अब तक दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। रिमांड के दौरान पुलिस जवाद अहमद सिद्दीकी से यूनिवर्सिटी के प्रशासन, वित्तीय लेन-देन और अन्य संदिग्ध गतिविधियों के बारे में विस्तार से पूछताछ करेगी। पुलिस को उम्मीद है कि इस पूछताछ से यूनिवर्सिटी के भीतर चल रहे कई गुप्त और गैरकानूनी कार्यों का पर्दाफाश हो सकेगा।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी केवल वित्तीय अनियमितताओं के कारण ही नहीं, बल्कि आतंकवाद विरोधी एजेंसियों की रडार पर होने के कारण भी विवादों में रही है। जांच के दौरान एक ऐसे मॉड्यूल का पता चला है जिसमें इस यूनिवर्सिटी में काम करने वाले डॉक्टर कथित तौर पर शामिल थे। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि यूनिवर्सिटी का एक डॉक्टर 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए कार विस्फोट में कथित रूप से संलिप्त पाया गया था। इस टेरर लिंक के सामने आने के बाद से ही पूरी यूनिवर्सिटी प्रशासन और उसके पदाधिकारियों की गतिविधियों पर एजेंसियां पैनी नजर रख रही हैं।
ईडी भी जवाद अहमद सिद्दीकी और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ कड़ी जांच कर रहा है। ईडी ने सिद्दीकी और अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी ने अब तक लगभग 54 एकड़ जमीन और उस पर किए गए निर्माण के रूप में करीब 139.97 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को कुर्क किया है। ईडी के अनुसार, जवाद सिद्दीकी ही इन सभी संस्थानों और इकाइयों पर पूर्ण नियंत्रण रखता था और वह गैरकानूनी तरीके से की गई कमाई का मुख्य लाभार्थी है।
जांच में यह भी पाया गया है कि जवाद अहमद सिद्दीकी का अल-फलाह यूनिवर्सिटी और अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर पर पूरा प्रशासनिक, वित्तीय और परिचालन नियंत्रण था। मैनेजिंग ट्रस्टी और चांसलर के रूप में, उसने अन्य पदाधिकारियों को केवल नाममात्र या प्रॉक्सी व्यक्तियों के रूप में रखा हुआ था।
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उस पर आरोप है कि उसने मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल के नियमों का उल्लंघन किया। सिद्दीकी ने जरूरी तथ्यों को छिपाकर और गलत जानकारी देकर मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी मंजूरी और सर्टिफिकेशन हासिल किए थे। रिमांड के दौरान पुलिस इन फर्जी दस्तावेजों और गलत सूचनाओं के पीछे के नेटवर्क को भी खंगालने की कोशिश करेगी ताकि शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में किए गए इस बड़े भ्रष्टाचार को उजागर किया जा सके।






