
Jhanvi Kukreja Murder Case (फोटो क्रेडिट-X)
Shree Jogdhankar Life Imprisonment: मुंबई के खार इलाके में 2021 की नए साल की पूर्व संध्या (New Year’s Eve) पर हुई 19 वर्षीय जान्हवी कुकरेजा की दर्दनाक हत्या के मामले में अदालत ने अपना विस्तृत फैसला सुना दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सत्यनारायण नवंदर ने आरोपी श्री जोगधनकर को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपराध स्थल पर पाए गए जान्हवी के ‘बालों के गुच्छे’ इस बात का सबसे बड़ा सबूत हैं कि गिरने से पहले उसके साथ बर्बरता की गई थी। इस फैसले ने बचाव पक्ष की उन दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें जान्हवी की मौत को आत्महत्या या दुर्घटना बताने की कोशिश की गई थी।
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि 1 जनवरी 2021 की रात खार स्थित एक इमारत की छत पर पार्टी के दौरान तीनों दोस्तों के बीच विवाद हुआ था। यह झगड़ा जोगधनकर और दीया पाडलकर के बीच संबंधों को लेकर शुरू हुआ, जिसके बाद जान्हवी को पांचवीं मंजिल से सीढ़ियों से नीचे घसीटा गया और अंततः दूसरी मंजिल से नीचे फेंक दिया गया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दूसरी और पहली मंजिल की सीढ़ियों के बीच जान्हवी के बालों के गुच्छे बिखरे हुए मिलना यह दर्शाता है कि उस पर कितना भीषण हमला हुआ था। न्यायाधीश ने टिप्पणी की, “बिखरे हुए बाल हिंसा के पुख्ता सबूत हैं। यह साबित करता है कि जान्हवी को सीढ़ियों से धक्का देने से ठीक पहले आरोपी ने उसे बेरहमी से पीटा था और उसके बाल खींचे थे।” पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दर्ज सिर की घातक चोटें और शरीर पर मौजूद अन्य घाव भी इसी हिंसक झड़प की पुष्टि करते हैं।
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न्यायाधीश ने आरोपी जोगधनकर के घटना के बाद के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि यदि यह कोई दुर्घटना होती, तो आरोपी शोर मचाता या पार्टी में मौजूद अन्य लोगों को मदद के लिए बुलाता। इसके विपरीत, जोगधनकर घटनास्थल से चुपचाप चला गया और अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों को भी गलत जानकारी दी। दोस्तों द्वारा संपर्क किए जाने पर भी वह “शांत और उदासीन” बना रहा। अदालत ने इसे एक अपराधी का आचरण मानते हुए कहा कि उसकी ये गतिविधियां सीधे तौर पर हत्या में उसकी संलिप्तता की ओर इशारा करती हैं।
अदालत ने बचाव पक्ष के उस तर्क को “अस्वीकार्य” बताया जिसमें दावा किया गया था कि जान्हवी ने आत्महत्या की है। कोर्ट ने कहा कि एक युवा लड़की, जिसकी मानसिक स्थिति सामान्य थी, उसके पास जान देने का कोई कारण नहीं था। वहीं, दूसरी आरोपी दीया पाडलकर को लेकर अदालत ने कहा कि हालांकि वह घटनास्थल पर मौजूद थी, लेकिन हत्या में उसका ‘साझा इरादा’ साबित नहीं हो सका। साक्ष्यों के अभाव में पाडलकर को संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) देते हुए बरी कर दिया गया। पुलिस की जांच और एफआईआर में देरी के दावों को भी अदालत ने प्रक्रियात्मक हिस्सा बताते हुए खारिज कर दिया।






