

Vasai Virar News In Hindi: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वसई विरार मनपा के तत्कालीन आयुक्त अनिल कुमार पवार को रिहा करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अनिल कुमार पवार पर कार्रवाई नियमानुसार होने की बात कहते हुए याचिका खारिज कर दी है। इससे ईंडी को बड़ा झटका लगा है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वसई विरार मनपा के उस समय के आयुक्त अनिल कुमार पवार के खिलाफ वसई विरार शहर में 41 बिल्डिंग्स के निर्माण लापरवाही बरतने और निर्माण की अनुमति देते समय कमीशन रेट तय करके निर्माण घोटाला करने के आरोप केस दर्ज किया था।
इस मामले में वसई विरार मनपा के पूर्व आयुक्त अनिल कुमार पवार को 13 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि पवार ने इस निर्माण घोटाला के जरिए 169 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई, लेकिन पवार ने इन गिरफ्तारी को गैर-कानूनी बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने इस गिरफ्तारी को गैर-कानूनी करार दिया और पवार को रिहा कर दिया।
ईडी ने वसई विरार शहर में 41 बिना इजाजत वाली बिल्डिंग्स के निर्माण और उससे सामने आए निर्माण घोटाले में कार्रवाई शुरू की है। इस मामले में, वसई विरार के पूर्व आयुक्त अनिल कुमार पवार, अर्बन प्लानिंग के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर वाई।एस। रेड्डी के साथ भू-माफिया सीताराम गुप्ता और अरुण गुप्ता को 13 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।
इस मामले में ईडी ने अब तक अनिल कुमार पवार और उनसे जुड़े बिल्डरों की प्रॉपर्टी के खिलाफ 71 करोड़ रुपये की प्रोविजनल सीजर कार्रवाई की है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई है। इस सीजर में अनिल पवार की पत्नी भारती पवार और जिन कंपनियों में वह डायरेक्टर हैं-जनार्दन एग्री, BSR रियल्टी, जे।ए। पवार बिल्डर्स, और श्रुतिका एंटरप्राइजेज (पवार की बेटी के नाम पर एक फर्म) की प्रॉपर्टी भी शामिल हैं। ईडी ने इस मामले में 341 पेज की चार्जशीट फाइल की है।