
आकर्ण धनुरासन (सौ. सोशल मीडिया)
Benefits Of Akarn Dhanurasana: भागदौड़ भरी जिंदगी और व्यस्त जीवनशैली की वजह से सेहत का ख्याल रख पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता है।भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों ऑफिस की कुर्सी पर एक ही मुद्रा में बैठना, अनियमित दिनचर्या और पोषक तत्वों की कमी से रीढ़ की हड्डी में दर्द और मांसपेशियां कमजोर होने से समस्या और बढ़ जाती है।
इसके साथ ही एक ही पॉस्चर में बैठे रहने से पीठ दर्द, जकड़न जैसी समस्याएं हो जाती है। इसके लिए दवाईयों से ज्यादा योग का सहारा लेना जरूरी होता है। प्राचीन योग में ही एक आसन आकर्ण धनुरासन इन समस्याओं का सरल और प्रभावी समाधान देता है।
शरीर को मजबूती और दिमाग को खुश रखने के लिए आकर्ण धनुरासन फायदेमंद होता है। आकर्ण धनुरासन रीढ़ को लचीला बनाता है, मांसपेशियों को मजबूत करता है और पूरे शरीर में संतुलन लाता है। नियमित अभ्यास से दर्द में राहत मिलती है और ऊर्जा बढ़ती है। इसे मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, आकर्ण धनुरासन एक ऐसा आसन है जो शरीर के कई हिस्सों को मजबूत और लचीला बनाता है। यह आसन धनुष और तीर की मुद्रा की तरह किया जाता है, जिसमें एक पैर को हाथ से पकड़कर कान के पास लाया जाता है।
अगर आप रोजाना की आदत में नियमित रूप से आकर्ण धनुरासन को शामिल करते है तो इसके कई तरह के लाभ मिलते है।
1- इस आसन को करने से शरीर के सभी अंगों पर राहत मिलती है। इस आकर्ण धनुरासन को करने से जांघों, कूल्हों और हैमस्ट्रिंग (पीछे की जांघ की मांसपेशियों) को मजबूत और लचीला बनाने में मदद करती है। इस आसन में पैर को ऊपर उठाने और खींचने की क्रिया से इन हिस्सों में स्ट्रेच आता है, जिससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और दर्द की शिकायत कम होती है।
2- इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी को फायदा मिलता है। रोजाना अभ्यास करने से रीढ़ में लचीलापन बढ़ता है और स्पाइनल कॉर्ड मजबूत बनता है। इससे पीठ दर्द, साइटिका और कमर की जकड़न जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
3- इस आसन को आप नियमित रूप से करते है तो, कंधे और भुजाओं को फायदा मिलता है।कंधे और भुजाएं भी इस आसन से मजबूत होती हैं। पैर को पकड़ने और खींचने में कंधों और हाथों की मांसपेशियां पूरी तरह सक्रिय रहती हैं, जिससे ऊपरी शरीर की ताकत बढ़ती है। यह आसन कंधों की जकड़न दूर करने और पोस्चर सुधारने में भी मदद करता है।
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4- अगर आप आकर्ण धनुरासन करते है तो पाचन तंत्र को इसका फायदा मिलता है। इस आसन को करने से कब्ज और अपच की समस्या से राहत मिलती है। पेट के अंगों पर पड़ने वाले दबाव से पाचन क्रिया बेहतर होती है और गैस, ब्लोटिंग जैसी दिक्कतें कम होती हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस आसन को शुरुआत में योग प्रशिक्षक की देखरेख में सीखें। गर्भवती महिलाएं, कमर या घुटने में गंभीर चोट वाले लोग इसे बिना सलाह के न करें। रोजाना 5-10 मिनट अभ्यास से शरीर में ऊर्जा और संतुलन का अनुभव होता है।
आईएएनएस के अनुसार






