
पुलिस की हिरासत में आप अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज। इमेज-सोशल मीडिया
Delhi Saurabh Bharadwaj News : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का पॉश इलाका जनकपुरी इन दिनों एक सड़क हादसे और उसके बाद उपजे सियासी घमासान का केंद्र बन गया है। बाइक सवार कमल ध्यानी की संदिग्ध मौत ने राजनीतिक रंग ले लिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव उस वक्त और बढ़ गया, जब आप के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को हिरासत में ले लिया गया। भारद्वाज अपनी पार्टी के अन्य नेताओं के साथ मृतक कमल ध्यानी के परिजनों से मिलने और उन्हें सांत्वना देने पहुंचे थे।
सौरभ भारद्वाज ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि जिस रात यह हादसा हुआ, कमल के परिजन अपने बेटे की तलाश में दर-दर भटकते रहे।
सौरभ भारद्वाज के अनुसार परिवार छह अलग-अलग थानों के चक्कर लगाता रहा, लेकिन किसी थाने ने समय पर शिकायत दर्ज नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय मामले में ढिलाई बरती और जरूरी जानकारी को भी नजरअंदाज किया।
हिरासत में लिए जाने के दौरान सौरभ भारद्वाज ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति बदतर होती जा रही है। उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि एलजी (LG) साहब और केंद्र सरकार का ध्यान सुरक्षा पर नहीं है। जब हम पीड़ित परिवार के लिए आवाज उठाते हैं तो हमें ही हिरासत में ले लिया जाता है। यह आवाज दबाने की कोशिश है, लेकिन हम चुप नहीं बैठेंगे। भारद्वाज ने यह भी संगीन आरोप लगाया कि मृतक कमल के मोबाइल फोन की लोकेशन और कुछ डिजिटल साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई या उन्हें जानबूझकर डिलीट किया गया।
Arrested – Being taken by Policehttps://t.co/dKl7jY7IMC — Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) February 8, 2026
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#WATCH | Delhi | AAP Delhi President Saurabh Bhardwaj says, “You can see the level of dictatorship. No one lodged a complaint, even when the parents of Kamal Dhyani (who died after falling into a pit on his bike in Janakpuri on 5th Feb) went to six police stations. The police are… pic.twitter.com/kTCcQNgYDp — ANI (@ANI) February 8, 2026
जनकपुरी की इस घटना ने दिल्ली पुलिस की प्रोएक्टिव इमेज पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को कानून-व्यवस्था की विफलता के रूप में भुना रही है। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि वे नियमों के तहत कार्रवाई कर रहे हैं। कमल ध्यानी की मौत महज एक सड़क हादसा है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश, यह तो जांच के बाद साफ होगा, लेकिन फिलहाल दिल्ली की सियासत इस पर पूरी तरह गर्म है। जनता अब जवाब चाहती है कि आखिर क्यों एक पीड़ित परिवार को न्याय की शुरुआत के लिए छह थानों की चौखट लांघनी पड़ी।






