
द लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर
लंदन/नई दिल्ली: ऋषि सुनक को ब्रिटेन आम चुनाव 2024 में करारी हार मिली है। भारतीय मूल के सुनक अब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे। द लेबर पार्टी के कीर स्टार्मर ने उन्हें चुनाव में करारी शिकस्त दी है। चुनाव परिणाम के रूझानों के मुताबिक लेबर पार्टी को संसद की 650 में से 410 सीटें मिली हैं। आइये जानते हैं कीर स्टार्मर के पीएम बनने पर भारत-ब्रिटेन के संबंध पर क्या असर डालेगा।
स्टार्मर ब्रिटेन के बनेंगे 58वें पीएम
ब्रिटेन आम चुनाव 2024 में जीत के साथ कीर स्टार्मर अब ब्रिटेन के 58वें प्रधानमंत्री बनेंगे। सुनक और स्टार्मर के पर्सनालिटी की बात करें तो दोनों नेताओं का व्यक्तित्व एक दूसरे से बिल्कुल उलट है। भारतवंशी सुनक खुद को धार्मिक बताते हैं वह हिंदू धर्म में विश्वास रखते हैं। दूसरी ओर स्टार्मर धार्मिक नहीं हैं वे भगवान में यकीन नहीं करते। साथ ही वे सुनक की तरह अरबपति भी नहीं हैं।
कैसे हो सकती है विदेश नीति
ऋषि सुनक भारतीय मूल के हैं इसलिए भी उनका भारत के प्रति रवैया सरकारात्म रहा है। भारत और ब्रिटेन दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत रहा। पर अब सुनक के विचार धारा के एकदम उलट कीर स्टार्मर ब्रिटेन के पीएम बनने जा रहे हैं। ऐसे में अब भारत-ब्रिटेन का संबंध आने वाले दिनों में कैसा होगा, इनकी विदेश नीति कैसी हो सकती है। इस पर नजर डालते हैं और समझने का प्रयास करते हैं।
स्टार्मर ने सुधारी कॉर्बिन की गलती
शुरुआत में द लेबर पार्टी का नजरिया भारत के प्रति नकारात्मक रहा है। साल 2015 में जेरेमी कॉर्बिन जब लेबर पार्टी के नेता बने, तब उन्होंने कश्मीर मुद्दे को लेकर कई ऐसे बयान दिए थे, जो भारत वासियों को बिल्कुल रास नहीं आया था। अभारत ने साल 2019 में कश्मीर में अनुच्छेद 370 को जब हटा दिया था, अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, तब कॉर्बिन एक आपातकालीन प्रस्ताव लेकर आए जिसमें उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों को स्वयं फैसले लेने का अधिकार होना चाहिए।
2019 में लेबर पार्टी बुरी हार हारी थी
कॉर्बिन के इस बयान के बाद ब्रिटेन में रहने वाले हिंदू वोटर्स उनसे नाराज हो गए और उन्हें एंटी इंडिया और एंटी हिंदू कहा। हिंदू वोटर्स से जुड़े संगठनों ने लेबर पार्टी को वोट न देने का दृढ़ फैसला किया। साल 2019 के आम चुनाव में द लेबर पार्टी को 1935 के बाद सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद पार्टी के तरफ से कॉर्बिन को पद से हटा दिया गया था।
स्टार्मर ने बदला स्टैंड
कॉर्बिन के बाद जब 2020 में कीर स्टार्मर लेबर पार्टी के नेता बनाया गया। उन्होंने कॉर्बिन की गलती सुधारी। साथ ही हिंदू वोटरों की नाराजगी खत्म करने की कोशिश की और कश्मीर मुद्दे पर पार्टी का स्टैंड बदला। स्टार्मर अनुच्छेद 370 हटाने का भारतीय संसद का मुद्दा बताया। इस मुद्दे से उन्होंने दूरी बनाई। उन्होंने कहा कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है, जिसे भारत और पाकिस्तान को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहिए।
स्टार्मर ने मंदिरों का किया दौरा
कश्मीर मुद्दे पर पार्टी के बदले स्टैंड का हिंदू संगठनों ने स्वागत किया। इसके बाद स्टार्मर ने ब्रिटेन में हिंदू मतदाताओं को रिझाने के और उन्हें मनाने के लिए मंदिरों का भी कई दौरे किये। हाल ही में उन्होंने चुनाव से महज 6 दिन पहले लंदन में एक मंदिर का दौरा भी किया था। साथ मंदिर को करुणा का प्रतीक बताया था।
भारत के पाक्षधर स्टार्मर
कीर स्टार्मर के इस कदम से पता चलता है कि वे भारत के साथ संबंध बेहतर करने के पक्षधर हैं। इसके अलावा उन्होंने पिछले साल इंडिया ग्लोबल फोरम में भारत-UK संबंधों को लेकर कहा था कि उनकी लेबर पार्टी सरकार भारत के साथ बेहतर संबंध बनाएगी। स्मार्टर ने कहा था कि मेरे पास आप सभी के लिए एक साफ संदेश है। यह एक बदली हुई लेबर पार्टी है। स्टार्मर ने कहा कि अगर उनकी सरकार बनती है तो वह भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू करेंगे। फिलहाल इससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि यूके की सरकार बदलने पर भी भारत-ब्रिटेन के बीच संबंध मजबूत ही रहेगा।
युद्ध में व्यस्त देशों के प्रति क्या है कीर की विदेश नीति
युद्ध में व्यस्त देशों पर कीर की विदेश नीति पर गौर करें तो रूस के साथ चल रहे संघर्ष में लेबर पार्टी यूक्रेन के लिए समर्थन जारी रख सकती है। वहीं इजरायल-गाजा विवाद के दृष्टिकोण में कुछ बदलाव कर सकती है, क्योंकि लेबर पार्टी इजरायल को हथियारों की बिक्री रोकने की योजना बना रही है । दूसरी तरफ फिलिस्तीनी देश को मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।






