
जमात-ए-इस्लामी प्रमुख का फेसबुक हैक, सांकेतिक तस्वीर, (सो. एआई)
Jamaat-e-Islami Chief Facebook Hack: बांग्लादेश में आम चुनाव से ठीक पहले सियासी माहौल गरमा गया है। जमात-ए-इस्लामी के अमीर (प्रमुख) शफीकुर रहमान के सोशल मीडिया अकाउंट से महिलाओं के खिलाफ की गई बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में एक नया मोड़ आया है। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच ने इस मामले में राष्ट्रपति भवन (बंगाभवन) के एक सहायक प्रोग्रामर मोहम्मद सरवर आलम को हिरासत में लिया है।
विवाद की शुरुआत पिछले शनिवार को हुई जब शफीकुर रहमान के फेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट साझा की गई। इस पोस्ट में आधुनिकता के नाम पर घर से बाहर निकलने वाली कामकाजी महिलाओं की तुलना ‘वेश्यावृत्ति’ से की गई थी। पोस्ट में तर्क दिया गया था कि जब महिलाओं को घर से बाहर धकेला जाता है तो उनका शोषण होता है और यह वेश्यावृत्ति का ही एक दूसरा रूप है। इस बयान के सामने आते ही पूरे बांग्लादेश में, विशेषकर ढाका यूनिवर्सिटी में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
चौतरफा घिरने के बाद जमात-ए-इस्लामी की आईटी सेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि उनके अमीर का अकाउंट हैक कर लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस हैकिंग के लिए राष्ट्रपति भवन के सरकारी ईमेल एड्रेस का इस्तेमाल किया गया।
आरोप है कि मोहम्मद सरवर आलम ने चुनाव से संबंधित जानकारी साझा करने के बहाने एक फाइल भेजी थी जिसके माध्यम से अकाउंट का एक्सेस हासिल किया गया। पुलिस ने सरवर आलम को मंगलवार देर रात राजारबाग इलाके से पकड़ा और उनका मोबाइल व लैपटॉप जब्त कर लिया है।
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से ठीक पहले हुए इस विवाद ने जमात की स्थिति को नाजुक बना दिया है। राजनीतिक विशेषज्ञों और आलोचकों का मानना है कि ‘हैकिंग’ की यह थ्योरी केवल महिला वोटरों की नाराजगी दूर करने के लिए एक ‘डैमेज कंट्रोल’ मात्र है।
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जानकारों का कहना है कि शफीकुर रहमान पहले भी कई साक्षात्कारों में महिलाओं के नेतृत्व और उनके सार्वजनिक जीवन में आने के खिलाफ कट्टर विचार व्यक्त कर चुके हैं। विपक्षी बीएनपी समर्थकों और आम जनता ने भी इस टिप्पणी की कड़ी निंदा की है। हालांकि, जमात का दावा है कि उनके कई नेताओं के अकाउंट्स पर साइबर हमले हुए हैं और यह पोस्ट उनकी आधिकारिक विचारधारा का हिस्सा नहीं है। फिलहाल, पुलिस अधिकारी शफीकुल इस्लाम के अनुसार, हिरासत में लिए गए कर्मचारी से पूछताछ के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






