

Nashik Municipal Politics: नासिक मनपा में उपमहापौर पद को लेकर शिवसेना (शिंदे गुट) के भीतर मची खींचतान पर गटनेता अजय बोरस्ते ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। बोरस्ते ने इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पार्टी के भीतर एक से अधिक उम्मीदवारों द्वारा नामांकन दाखिल किए जाने से अनुशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
राज्य की विभिन्न नगर निगमों में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच हुए समझौते के अनुसार, सत्ता में बड़े दल को महापौर और दूसरे बड़े दल को उपमहापौर पद देने का सूत्र तय हुआ है। इसी के तहत नासिकमें उपमहापौर पद शिवसेना के खाते में जाना तय माना जा रहा है। अजय बोरस्ते ने बताया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट रूप से विलास शिंदे को नामांकन भरने का आदेश दिया था, जिसकी जानकारी पार्टी की बैठक में भी दी गई थी।
निर्देशों के बावजूद महानगर प्रमुख प्रवीण (बंटी) तिदमे ने खुद को भी आदेश मिलने का दावा करते हुए स्वतंत्र नामांकन दाखिल कर दिया। दूसरी ओर, सुवर्णा मटाले ने अपना नामांकन वापस ले लिया, लेकिन राहुल दिवे भी चुनावी मैदान में उतर आए हैं। इस अनुशासनहीनता पर कड़ा रुख अपनाते हुए बोरस्ते ने चेतावनी दी है कि पार्टी में इस तरह के कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसकी शिकायत शीर्ष नेतृत्व से की जाएगी।
उपमहापौर पद के अधिकृत उम्मीदवार विलास शिंदे ने कहा कि “मैंने गटनेता के निर्देशानुसार और पक्ष प्रमुख का आदेश मिलने पर ही अपना नामांकन दाखिल किया है। शिवसेना एक अनुशासित पार्टी है और मैं पार्टी के अंतिम निर्णय का पालन करूंगा। अन्य उम्मीदवारों के नामांकन के विषय में गटनेता ही बेहतर जवाब दे पाएंगे।”