
इस्लामाबाद ब्लास्ट के खिलाफ कश्मीर में प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Kashmir Protest After Shia Mosque Attack Islamabad: शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शिया मस्जिद के बाहर एक आतंकी ने खुद को बम से उड़ा लिया। जिसमें अब तक 69 लोगों की मौत हो गई और 170 से ज्यादा गंभीर रूस से घायल है। इसी बीच कश्मीर घाटी में लोग इस हमले के खिलाफ सड़कों पर उतर और विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए।
जानकारी के मुताबिक, हमले की खबर फैलते ही जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। ये प्रदर्शन किसी संगठन या राजनीतिक दल के बुलावे पर नहीं थे, बल्कि सीधे आम जनता की प्रतिक्रिया थी। इन प्रदर्शनों में शिया समुदाय के लोगों ने खुलकर पाकिस्तान का विरोध किया।
बारामूला के चैनाबल पट्टन और डाइवर परिहासपोरा में लोग सड़कों पर उतरे और कुछ समय के लिए यातायात रोक दिया। श्रीनगर के शिया बहुल इलाकों इमामबाड़ा जदीबल और हरवान में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी हुई। बांदीपोरा के इंदरकोट-सुंबल इलाके में मोमबत्तियां जलाकर हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। प्रदर्शनकारियों ने लगातार “पाकिस्तान मुर्दाबाद” और “हुकूमत-ए-पाकिस्तान मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए। घाटी में लंबे समय बाद इतनी खुली नाराजगी देखने को मिली।
Protest erupts in Bandipora J&K, as Shia residents condemn the killing of Shia Muslims in a bomb blast during Friday prayers in Islamabad, Pakistan.@ajaykraina @ChinarcorpsIA @HBjournalist @KashmirAhead @LtGenDPPandey pic.twitter.com/B1O2SnUxLL — Zubair chowdhary (@ZubairChowdhary) February 6, 2026
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये प्रदर्शन पाकिस्तान और उसके आर्मी चीफ आसिम मुनीर के लिए बड़ा झटका हैं। पाकिस्तान सालों से खुद को कश्मीर के मुसलमानों का रक्षक बताता रहा है, लेकिन अपने ही देश में बार-बार शिया समुदाय पर हमले इसका दावा कमजोर कर रहे हैं।
गौर करने देने वाली बात यह है कि ये विरोध किसी राजनीतिक या अलगाववादी संगठन की अगुवाई में नहीं हुए। यह सीधे समुदाय के भीतर से उभरी प्रतिक्रिया थी, जो डर, गुस्सा और असुरक्षा को दर्शाती है।
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान में मस्जिदों और धार्मिक जुलूसों पर हमले अब कश्मीर में उलटा असर डाल रहे हैं। पहले ये घटनाएं पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति पैदा करने की कोशिश करती थीं, लेकिन अब यही घटनाएं पाकिस्तान के खिलाफ नाराजगी में बदल रही हैं। लोग सवाल कर रहे हैं कि जो देश अपने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं कर सकता, वह दूसरों का रक्षक कैसे बन सकता है।
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ये प्रदर्शन सीमा पार बैठे उन लोगों के लिए भी चेतावनी हैं, जो कश्मीर में धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश करते रहे हैं। अब कश्मीर का शिया समुदाय पाकिस्तान को अपने भविष्य का भागीदार मानने के बजाय उसे अस्थिरता का स्रोत समझने लगा है।






