
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Teachers Protest: माध्यमिक नासिक शिक्षणाधिकारी कार्यालय में व्याप्त अव्यवस्था और शिक्षकों के लंबित पड़े काम को लेकर राज्य शिक्षक-शिक्षकेतर सेना ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को शिक्षणाधिकारी की अनुपस्थिति में संगठन के पदाधिकारियों ने कार्यालय अधीक्षक को निवेदन सौंपकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो कार्यालय के सामने उग्र धरना आंदोलन किया जाएगा। जिले की विभिन्न स्कूलों में कार्यरत हजारों शिक्षकों को अपने वाजिब हकों के लिए सरकारी -दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
-शिक्षकों की पदोन्नति, रुका हुआ -वेतन, सेवानिवृत्ति के लाभ और मेडिकल बिलों का भुगतान पिछले कई महीनों से लंबित है। आरोप है कि शिक्षणाधिकारी अक्सर बैठकों के बहाने – कार्यालय से नदारद रहते हैं, जिसके कारण कर्मचारियों पर किसी का वश नहीं रहा।
शिक्षक महीनों से दफ्तर की चौखट घिस रहे हैं, लेकिन अधिकारी केवल 5-10 मिनट के लिए आकर निकल जाते हैं। संगठन ने पिछले 6 महीनों से जमा हुए प्रस्तावों, मंजूर किए गए केस और त्रुटि बताकर रोके गए आवेदनों की विस्तृत जानकारी मांगी हैं।
शिक्षक सेना के राज्य उपाध्यक्ष प्रा. संजय चव्हाण ने कहा कि शिक्षा विभाग की मनमानी अब बर्दाश्त के बाहर है। उन्होंने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमकार पवार से मिलकर भी इस समस्या की शिकायत की है।
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संगठन अब शिक्षा मंत्री दादा भुसे से मिलकर मांग करेगा कि इस मुद्दे को आगानी विधानसभा अधिवेशन में उठाया जाए, साथ ही, काम में देरी करने वाले संबंधित कर्मचारियों पर ‘दफ्तर दिरंगाई’ अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए, शिक्षक सेना ने शिक्षणाधिकारी कार्यालय को 40 प्रलंबित शैक्षणिक समस्याओं की एक विस्तृत सूची सौंपी है। उनकी मांग है कि विभाग जल्द से जल्द ‘सविचार सभा आयोजित करें।






