
व्लादिमीर पुतिन परमाणु हथियार, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Abu Dhabi Russia US Meeting News Hindi: शीत युद्ध के बाद से दुनिया को परमाणु युद्ध के साये से बचाकर रखने वाली रूस और अमेरिका के बीच की आखिरी परमाणु हथियार संधि New START गुरुवार को समाप्त हो गई है। इसके साथ ही आधी सदी में पहली बार दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु शस्त्रागारों पर से सभी सीमाएं हट गई हैं जिससे एक अनियंत्रित परमाणु हथियारों की दौड़ शुरू होने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, क्रेमलिन के अनुसार, दोनों पक्ष जल्द ही नई वार्ता शुरू करने की आवश्यकता पर सहमत हुए हैं।
रूस और अमेरिका के वार्ताकारों ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी में दो दिनों तक यूक्रेन शांति समझौते के साथ-साथ परमाणु संकट पर चर्चा की। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि दोनों पक्ष इस मुद्दे पर जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने की आवश्यकता को समझते हैं और जिम्मेदार रुख अपनाएंगे। हालांकि, पेसकोव ने किसी भी ‘अनौपचारिक’ समझौते की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि संधि के प्रावधानों को केवल औपचारिक तरीके से ही आगे बढ़ाया जा सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘न्यू स्टार्ट’ को अमेरिका के लिए एक खराब समझौता करार दिया है। उनका तर्क है कि किसी भी नई और आधुनिक संधि में चीन को भी शामिल किया जाना चाहिए। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि हमें एक ऐसी नई और बेहतर संधि पर काम करना चाहिए जो भविष्य में लंबे समय तक चले। वहीं, एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक थॉमस डीनान्नो ने जिनेवा में आरोप लगाया कि चीन गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण कर रहा है और उसके पास कोई पारदर्शिता नहीं है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले प्रस्ताव दिया था कि यदि वॉशिंगटन तैयार हो तो रूस एक साल के लिए संधि की सीमाओं का पालन करने को तैयार है ताकि नई संधि के लिए समय मिल सके। हालांकि, पुतिन ने 2023 में इस संधि में भागीदारी निलंबित कर दी थी क्योंकि अमेरिका और नाटो यूक्रेन में रूस की हार चाहते थे। इस तनाव के बीच एक सकारात्मक संकेत यह है कि अबू धाबी में बैठक के बाद दोनों देशों ने उच्च स्तरीय सैन्य-से-सैन्य संवाद को फिर से स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है, जो 2021 से निलंबित था।
यह भी पढ़ें:- बांग्लादेश चुनाव: क्या तारिक रहमान बचा पाएंगे जिया परिवार की विरासत? ‘परिवारवाद’ पर छिड़ी भीषण जंग
चीन ने फिलहाल किसी भी परमाणु वार्ता में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, उनके परमाणु हथियार रूस और अमेरिका के स्तर पर नहीं हैं इसलिए वे वर्तमान चरण में ऐसी वार्ताओं का हिस्सा नहीं बनेंगे। साथ ही, बीजिंग ने अमेरिका को सलाह दी है कि वह रूस के साथ बातचीत फिर से शुरू करे।






