'परमाणु हथियार खत्म करो...', मिडिल ईस्ट को लेकर चीन का मास्टरप्लान, UN में रखे 3 गेम-चेंजर प्रस्ताव

China UN Statement: संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में चीन के उप स्थायी प्रतिनिधि कंग श्वांग ने मध्य पूर्व को परमाणु और सामूहिक विनाशकारी हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए तीन अहम प्रस्ताव पेश किए हैं।
'Abolish nuclear weapons...' China's masterplan for the Middle East, 3 game-changing proposals presented to the UN
मिडिल ईस्ट को लेकर चीन का मास्टरप्लान, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
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Nuclear Disarmament Middle East: संयुक्त राष्ट्र में चीन के उप स्थायी प्रतिनिधि कंग श्वांग ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मध्य पूर्व को परमाणु हथियारों और सामूहिक विनाश के हथियारों (डब्ल्यूएमडी) से मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में तीन प्रमुख प्रस्ताव पेश किए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में लंबे समय से तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।

कंग श्वांग ने संयुक्त राष्ट्र के छठे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि परमाणु-मुक्त मध्य पूर्व न केवल हथियारों की होड़ को रोकने में मददगार होगा, बल्कि यह क्षेत्रीय देशों के बीच भरोसा बढ़ाने और स्थायी शांति स्थापित करने के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दशकों से इस क्षेत्र में जारी अस्थिरता और बढ़ते टकराव ने वैश्विक शांति व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर दी है।

मध्य पूर्व को परमाणु-मुक्त बनाने का प्रयास

अपने संबोधन में कंग श्वांग ने चीन की ‘‘मानव जाति के साझा भविष्य वाले समुदाय’’ की अवधारणा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चीन वैश्विक विकास, वैश्विक सुरक्षा, वैश्विक शासन और वैश्विक सभ्यता जैसे बड़े विज़न पर कार्य कर रहा है, जिनका उद्देश्य दुनिया भर में स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देना है। उनके अनुसार, ये विचारधाराएं और समाधान मध्य पूर्व को परमाणु-मुक्त बनाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

सैन्य टकराव समाधान नहीं

उन्होंने कहा कि चीन का मानना है कि सभी देशों को साझा सुरक्षा के सिद्धांत को अपनाना चाहिए। सैन्य टकराव किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि बातचीत, राजनय और सहयोग के जरिए ही क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा हासिल की जा सकती है। कंग श्वांग ने स्पष्ट कहा कि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी), रासायनिक हथियार निषेध संधि (सीडब्ल्यूसी) और जैविक हथियार निषेध संधि (बीडब्ल्यूसी) जैसे अंतर्राष्ट्रीय समझौते इस दिशा में मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

अपने तीन प्रमुख प्रस्तावों में कंग श्वांग ने निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया- 

1- अंतर्राष्ट्रीय अप्रसार प्रणाली को मजबूती से लागू करना, ताकि परमाणु हथियारों को फैलने से रोका जा सके।

2- क्षेत्रीय देशों के बीच संवाद को बढ़ावा देना, जिससे अविश्वास दूर कर शांति-स्थापना के प्रयास मजबूत हों।

3- परमाणु-हथियार संपन्न देशों की जिम्मेदारी तय करना, ताकि वे मध्य पूर्व में परमाणु-मुक्ति की प्रक्रिया का सक्रिय समर्थन करें।

कंग श्वांग ने कहा कि मध्य पूर्व को परमाणु-मुक्त क्षेत्र बनाना वहां की जनता की शांति, स्थिरता और विकास की साझा आकांक्षा का प्रतीक है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर परमाणु-हथियार संपन्न देशों से इस दिशा में सहयोग बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि चीन इस पूरी प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अरब देशों की वाजिब मांगों का सम्मान और समाधान इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बेहद आवश्यक है। चीन का रुख हमेशा से संवाद, विकास और शांति को बढ़ावा देने का रहा है और भविष्य में भी वह इसी दिशा में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।

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