
सिरिल रामफोसा और शी जिनपिंग, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
South Africa China Trade Deal News In Hindi: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीतियों और भारी आयात शुल्कों ने वैश्विक समीकरणों को बदलना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में, अफ्रीका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, दक्षिण अफ्रीका ने अमेरिका को बड़ा कूटनीतिक और व्यापारिक झटका देते हुए चीन के साथ एक नए ‘ट्रेड डील’ के लिए फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम ट्रंप प्रशासन की ‘रेसिप्रोकल टैरिफ पॉलिसी’ के जवाब में देखा जा रहा है जिसने दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।
ताजा तनाव की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नई नीतियों के तहत दक्षिण अफ्रीका से आने वाले कुछ सामानों पर 30 प्रतिशत तक की ड्यूटी लगा दी। यह दर दुनिया भर में लागू की गई सबसे ऊंची दरों में से एक मानी जा रही है।
इतना ही नहीं, ट्रंप प्रशासन ने कूटनीतिक स्तर पर भी दक्षिण अफ्रीका को घेरते हुए उसे इस साल अमेरिका में होने वाली G20 देशों की बैठकों में हिस्सा लेने से रोक दिया। इन घटनाक्रमों के बाद दक्षिण अफ्रीका ने अमेरिकी निर्भरता कम करने के लिए विकल्प तलाशने शुरू कर दिए थे।
शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को दक्षिण अफ्रीका के व्यापार और उद्योग मंत्री पार्क्स टाउ ने चीन में इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। दक्षिण अफ्रीकी मंत्रालय को उम्मीद है कि यह ट्रेड डील मार्च के अंत तक पूरी तरह से फाइनल हो जाएगी। इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दक्षिण अफ्रीका के कुछ प्रमुख उत्पादों जैसे कि फलों को चीनी बाजार में ‘ड्यूटी-फ्री’ पहुंच मिलेगी।
बदले में, चीन को दक्षिण अफ्रीका के भीतर निवेश के बड़े अवसर प्राप्त होंगे। विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीकी बाजार में चीनी कारों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह समझौता बीजिंग के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होने वाला है।
दक्षिण अफ्रीका के व्यापार मंत्रालय के अनुसार, इस साझेदारी से न केवल कृषि बल्कि माइनिंग (खनन), रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) और टेक्नोलॉजी सेक्टर को भी भारी मजबूती मिलेगी। चीन पहले से ही दक्षिण अफ्रीका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और अब यह नई डील पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में चीन के आर्थिक प्रभाव को और अधिक विस्तार देगी।
मंत्री पार्क्स टाउ ने स्पष्ट किया कि दक्षिण अफ्रीका चीन के साथ दोस्ताना, व्यावहारिक और लचीले तरीके से काम करने को तैयार है जो सीधे तौर पर ट्रंप की आक्रामक व्यापारिक नीतियों को एक कड़ा संदेश है।
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हालांकि दक्षिण अफ्रीका ने चीन के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ा ली हैं लेकिन उसने वॉशिंगटन के साथ पूरी तरह से रिश्ते नहीं तोड़े हैं। दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों का कहना है कि वे अभी भी एक बेहतर व्यापारिक समझौते के लिए अमेरिका के साथ बातचीत के रास्ते तलाश रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण अफ्रीका की यह दोहरी रणनीति ट्रंप प्रशासन पर टैरिफ कम करने के लिए दबाव बनाने का एक तरीका भी हो सकती है।






