जिगपिंग से मिल PM मोदी ने ट्रंप को दिया जवाब, कहा- हमे किसी तीसरे देश की जरूरत नहीं

India-China Relations: पीएम मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी से मुलाकात की, दोनों ने आतंकवाद और व्यापार पर सहयोग जरूरी बताया। यह चीन यात्रा सात साल बाद हुई, यह यात्रा टैरिफ विवाद के बीच हो रही है।
जिगपिंग से मिल PM मोदी ने ट्रंप को दिया जवाब, कहा- हमे किसी तीसरे देश की जरूरत नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो- सोशल मीडिया)
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PM Modi in SCO Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग रविवार को मिले। इस मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने कहा कि भारत और चीन के रिश्तों को किसी तीसरे देश की नजर से नहीं देखना चाहिए। यह बात डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी संदेश मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने भारत पर भारी टैक्स लगाए हैं।

इस दौरान विदेश मंत्रालय ने भी इस मुलाकात पर बयान दिया है। उसमें कहा गया है कि दोनों नेताओं ने आतंकवाद, व्यापार और अन्य मुद्दों पर साथ काम करने की जरूरत जताई है। पीएम मोदी सात साल बाद चीन के दो दिवसीय दौरे पर गए हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी टैरिफ भारत और चीन दोनों परेशान है और नए विकल्प तलाश रहे हैं।

SCO सम्मेलन में शामिल होंगे पीएम मोदी

यह मुलाकात 31वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन से अलग हुई। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 50% टैक्स लगा दिया है। इसके बाद पीएम मोदी जापान और चीन की यात्रा पर गए हैं। चीन की यात्रा खास इसलिए है क्योंकि पीएम मोदी सात साल बाद वहां पहुंचे हैं। गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते ठंडे हो गए थे, लेकिन अब मोदी इन रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने कहा कि मतभेदों को झगड़े में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने अपनी अर्थव्यवस्थाओं की दुनिया में महत्वपूर्ण भूमिका स्वीकार की और सीमा विवाद को शांति से हल करने की बात की। उन्होंने पिछली मुलाकात (अक्टूबर 2024 में रूस में) के बाद से संबंधों में आई अच्छी प्रगति की तारीफ की। दोनों देश विकास के साथी हैं, दुश्मन नहीं। मतभेद झगड़े में नहीं बदलने चाहिए।

भारत-चीन की दोस्ती एशिया के लिए अच्छी

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया कि भारत और चीन के बीच सम्मान, हित और समझदारी पर आधारित मजबूत और स्थिर संबंध होना जरूरी है। यह दोनों देशों के विकास के लिए और 21वीं सदी के बहु-ध्रुवीय दुनिया और एशिया के लिए अच्छा होगा। लोगों के बीच संबंध बढ़ाने के लिए सीधी उड़ानें और वीजा सुविधाएं भी बढ़ाने की बात हुई है। खास बात यह है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा भी फिर से शुरू की जाएगी।

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