अमेरिका ने रूस के माथे से हटाया दुश्मन का टैग, ट्रंप ने पुतिन से निभाई यारी, गदगद हुआ क्रेमलिन

Trump Russia Policy: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस को अब अमेरिका के लिए खतरा नहीं माना, और नाटो के विस्तार को रोकने का वादा किया, जिससे रूस खुश है, लेकिन यूरोप में चिंता है।
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ट्रंप ने रूस को खतरे की सूची से हटाया (सोर्स- सोशल मीडिया)
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US Russia Removed from Threat List: यूक्रेन और रूस के बीच जंग अब भी जारी है। लेकिन हाल ही में अमेरिका से एक ऐसी खबर आई है, जिसने रूस को खुश कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति जारी की है, जिसमें यह चौंकाने वाला फैसला लिया गया है कि अब रूस को अमेरिका के लिए एक बड़ा खतरा नहीं माना जाएगा। यह फैसला ओबामा और बाइडन प्रशासन की नीतियों से एक बड़ा बदलाव है।

ट्रंप के इस नए फैसले को रूस ने खुशी-खुशी स्वीकार किया। रूस के अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप की सोच पुतिन की सोच से मेल खाती है। 2014 में क्रीमिया पर कब्जे और 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद से, अमेरिका ने हमेशा रूस को एक खतरनाक और आक्रामक देश माना था। लेकिन अब ट्रंप की नीति 'फ्लेक्सिबल रियलिज्म' (लचीली वास्तविकता) पर आधारित है।

नाटो के विस्तार को रोकने का वादा

नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में अमेरिका ने इसमें कहा गया है कि वो रूस के साथ दुश्मनी बढ़ाने के बजाय, रणनीतिक स्थिरता बनाए रखना चाहता है। रूस के लिए और भी खुशखबरी इस दस्तावेज में छिपी नाटो नीति में है। ट्रंप की रणनीति में नाटो के विस्तार को रोकने का वादा किया गया है। रूस ने इसे सकारात्मक कदम माना है। रूस का कहना है कि अमेरिका का रूस को खतरा न मानना और सहयोग की बात करना, दोनों देशों के रिश्तों में सुधार का संकेत है।

हालाँकि, यूरोप में इस रणनीति को लेकर चिंता है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यूरोप सभ्यता के संकट का सामना कर रहा है। रूस भी यही मानता है कि यूरोप का प्रभाव अब खत्म हो रहा है। यूरोप के बड़े देशों को डर है कि ट्रंप ने यूरोप की सुरक्षा को नजरअंदाज किया है और अब उसे अपने हाल पर छोड़ दिया है।

डीप स्टेट डाल सकती है रुकावट

रूस के प्रवक्ता ने कहा कि ट्रंप का विचार भले ही अच्छा हो, लेकिन अमेरिका की नौकरशाही (डीप स्टेट) उनके रास्ते में रुकावट डाल सकती है। ट्रंप के आलोचक इसे पुतिन के सामने घुटने टेकने जैसा मान रहे हैं, जबकि ट्रंप का कहना है कि उनका लक्ष्य युद्ध को खत्म करना है और इसके लिए रूस से बातचीत जरूरी है।

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