
ईरान में खामेनेई के खिलाफ सड़कों पर गुस्सा, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran Protests Latest News In Hindi: ईरान में हालात तेजी से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। देश के कई शहरों में जेन-जी के युवा महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। विरोध-प्रदर्शन का केंद्र सरकार की नीतियां और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई का शासन है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जीवन-यापन की लागत बढ़ने और रोजगार के अवसर घटने से युवाओं का भविष्य अंधकार में है।
इस बीच अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री और सीआईए के पूर्व निदेशक माइकल रिचर्ड पोम्पिओ ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए विवाद को और हवा दे दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोम्पिओ ने दावा किया कि जब ईरान खामेनेई शासन के खिलाफ विरोध में डूबा हुआ है, तब इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट प्रदर्शनकारियों के साथ मार्च कर रहे हैं।
पोम्पिओ ने अपने पोस्ट में कहा कि ईरानी सरकार मुश्किल में है। भाड़े के सैनिकों को लाना उसकी आखिरी सबसे अच्छी उम्मीद है। दर्जनों शहरों में दंगे हो रहे हैं मशहद, तेहरान, जाहेदान। अगला पड़ाव बलूचिस्तान हो सकता है। इस सरकार को 47 साल हो गए; पोटस 47 इत्तेफाक? नए साल की शुभकामनाएं हर ईरानी को और उनके साथ चल रहे हर मोसाद एजेंट को भी।
पोम्पिओ के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के अंदर जारी आर्थिक अस्थिरता का फायदा उठाने की कोशिशें हो सकती हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया है कि इजरायल और पश्चिमी देश ईरान में सरकार-विरोधी भावनाओं को भड़काने के लिए सक्रिय रणनीति अपना सकते हैं।
मोसाद से जुड़े बताए जा रहे कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स ने भी हाल के दिनों में ऐसे संदेश पोस्ट किए हैं जिनमें फारसी भाषा का इस्तेमाल कर ईरानी जनता से सड़कों पर उतरने की अपील की गई। एक पोस्ट में लिखा गया कि एक साथ सड़कों पर निकलो। समय आ गया है। हम तुम्हारे साथ हैं सिर्फ दूर से नहीं, जमीन पर भी।
इन दावों के बाद ईरान में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इन प्रदर्शनों के पीछे विदेशी खुफिया एजेंसियों की भूमिका है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि एआई से बने फोटो और वीडियो के जरिए भीड़ को उकसाने की कोशिशें की जा सकती हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
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फिलहाल, ईरान में सुरक्षा बल अलर्ट पर हैं और सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ये प्रदर्शन किस दिशा में जाते हैं और क्या सरकार किसी बड़े राजनीतिक या आर्थिक कदम की घोषणा करती है।






