बोर्ड की सख्ती पर भड़के शिक्षक! नकल के लिए केंद्र संचालकों पर निलंबन की तलवार; संगठनों ने खोला मोर्चा

Maharashtra State Board Exam: महाराष्ट्र बोर्ड परीक्षा में नकल मिलने पर शिक्षकों का वेतन रोकने और निलंबन की कार्रवाई का विरोध। शिक्षक संगठनों ने बोर्ड की नीतियों को बताया अनुचित।
Maharashtra Protests against withholding teachers' salaries and suspending them for cheating in board exams.
बोर्ड परीक्षा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Cheating Free Campaign: स्टेट बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान नकल के मामले मिलने पर संबंधित केंद्र संचालकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई से शिक्षक संगठनों की नाराजगी सामने आने लगी है। संगठनों का कहना है कि यदि सीसीटीवी, ड्रोन से पहरेदारी और पुलिस निगरानी के बाद भी यदि छात्र नकल करते हैं तो इसमें पर्यवेक्षकों सहित केंद्र संचालकों का क्या दोष है।

वहीं बोर्ड ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए शिक्षकों का वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने तक की सिफारिश की है। शुक्रवार से 10वीं की भी परीक्षाएं आरंभ होने जा रही हैं। 12वीं की तुलना में 10वीं में नकल के मामले अधिक सामने आते हैं। 12वीं की परीक्षा में अब तक नकल के 22 मामले सामने आये हैं।

जिन केंद्रों पर नकलची छात्र मिले हैं, उन केंद्रों के संचालकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा रही है। निलंबन के साथ ही उन शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने के बारे में भी संस्था चालकों से सिफारिश की जाएगी। इसी कार्रवाई को लेकर शिक्षक संगठन आक्रामक हो गये हैं।

  • 22 नकल के मामले 12वीं में मिले
  • 6 उड़न दस्ते ही जिले भर में तैनात
  • 29 केंद्र जिले में संवेदनशील घोषित

संगठनों का कहना है कि जब बोर्ड की समूची यंत्रणा परीक्षा लेने में लगी है, तो फिर अकेले शिक्षकों पर ही कार्रवाई क्यों। वेतन वृद्धि रोकने के बाद जब इसे दोबारा शुरू करने संबंधी प्रस्ताव शिक्षा विभाग के पास भेजा जाता है तो वहां आर्थिक लेन-देन होता है। यानी परीक्षा के नाम पर की जाने वाली कार्रवाई में भी ‘लक्ष्मी दर्शन’ होने लगा है।

दोषी पाये जाने पर ही हो एक्शन: विजुक्टा

‘विजुक्टा’ के महासचिव डॉ. अशोक गव्हाणकर ने बताया कि नकल के मामलों में किसी भी शिक्षक पर कार्रवाई से पहले समूची जांच की जानी चाहिए। केवल सीसीटीवी के फुटेज के आधार पर कार्रवाई करना योग्य नहीं है।

अधिकांश शिक्षक परीक्षा को नकल मुक्त बनाने की ही दिशा में कार्य करते हैं। इस तरह की कार्रवाई से शिक्षकों का मनोबल गिरता है। वैसे भी इस मामले में शिक्षकों का कोई दोष नहीं होता है। वैसे भी परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र अन्य स्कूलों के होते हैं।

मॉनिटरिंग की उचित सुविधा नहीं

शुक्रवार से शुरू होने जा रही 10वीं की परीक्षा में अकेले नागपुर जिले में ही 29 संवेदनशील केंद्र हैं जबकि जिले भर में उड़न दस्तों की संख्या महज 6 है। उड़न दस्तों की संख्या कम होने की वजह से सभी केंद्रों पर पहुंचना संभव नहीं है। वहीं ग्रामीण भागों के संवेदनशील केंद्रों में भी कभी-कभार ही निरीक्षण किया जाता है।

शिक्षक संगठनों का आरोप है कि शिक्षा विभाग परीक्षा व्यवस्था पर निधि खर्च करने में कंजूसी कर रहा है जबकि अधिकाधिक उड़न दस्ते तैनात किये जाने चाहिए। इससे छात्रों सहित नकल कराने वाले शिक्षकों पर भी दबाव बना रहेगा। परीक्षा को लेकर सख्ती अनेक तरह की की गई है, लेकिन मॉनिटरिंग की उचित सुविधा नहीं है।

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