12 अरब और इस्लामी देशों ने ईरानी हमलों की निंदा की और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की मांग रखी

Middle East Conflict: 12 अरब और इस्लामी देशों ने ईरान द्वारा कतर और अन्य क्षेत्रों में किए गए हमलों की निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने तथा क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान करने को कहा है।
Arab and Islamic Nations Condemn Iranian Aggression and Attacks on Regional Energy Infrastructure 
12 अरब और इस्लामी देशों ने ईरानी हमले रोकने की मांग की (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Escalation Of Middle East Conflict: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने अब पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है जिससे शांति भंग हो गई है। हाल ही में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में 12 महत्वपूर्ण अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने एक अहम बैठक की थी। इस बैठक के दौरान सभी देशों ने ईरान द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की एक सुर में कड़ी निंदा करते हुए विरोध जताया। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि ईरान की यह सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है और इसे तत्काल प्रभाव से रोकना चाहिए।

रियाद में महत्वपूर्ण बैठक

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में गुरुवार को 12 अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान के बढ़ते सैन्य हस्तक्षेप पर चर्चा की। इस बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में अजरबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब जैसे देश शामिल थे। इन सभी देशों ने ईरान से अपनी आक्रामक हरकतों को बंद करने और पड़ोसी देशों की सीमाओं का सम्मान करने की सख्त अपील की है।

ऊर्जा केंद्रों पर हमले

इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स फील्ड पर हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कतर और संयुक्त अरब अमीरात के गैस प्लांटों को निशाना बनाया। ईरान के इन हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है और वहां के रिहायशी इलाकों में भी दहशत का माहौल पैदा किया है। विदेश मंत्रियों ने कहा कि ईरान ने जानबूझकर तेल सुविधाओं, डीसेलिनेशन प्लांटों और हवाई अड्डों जैसे नागरिक ठिकानों को अपना निशाना बनाया है।

कतर की कड़ी कार्रवाई

कतर ने अपने रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए ईरानी हमले को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक सीधा खतरा करार दिया है। कतर सरकार के अनुसार यह हमला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2817 का गंभीर उल्लंघन है जो अंतरराष्ट्रीय शांति को बाधित करता है। कतर ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अटैशे सहित पूरे स्टाफ को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' घोषित कर दिया है।

राजनयिकों का निष्कासन

कतर ने ईरानी राजनयिकों और उनके कार्यालय के कर्मचारियों को केवल 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का सख्त निर्देश जारी कर दिया है। 'पर्सोना नॉन ग्राटा' घोषित होने का मतलब है कि अब कतर इन विदेशी राजनयिकों को अपने देश में स्वीकार नहीं करेगा और उनका रहना अवैध है। कतर ने स्पष्ट किया कि वह हमेशा संघर्ष से दूर रहने की नीति अपनाता रहा है लेकिन ईरान ने बार-बार उसकी शांति भंग की है।

भविष्य की चेतावनी

संयुक्त बयान में ईरान को चेतावनी दी गई है कि उसके साथ भविष्य के संबंध केवल पड़ोसी देशों की संप्रभुता के सम्मान पर निर्भर करेंगे। मंत्रियों ने कहा कि ईरान को अपनी सैन्य क्षमताओं का उपयोग किसी भी देश को धमकाने या उनके आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए नहीं करना चाहिए। इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि सभी देश अंतरराष्ट्रीय नियमों का पूरी तरह पालन करें।

क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन

विदेश मंत्रियों ने न केवल ईरान बल्कि लेबनान पर हुए इजरायली हमलों की भी निंदा की और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि बढ़ता हुआ तनाव अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा है जिसे कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही सुलझाया जाना संभव है। ईरान द्वारा खाड़ी देशों और तुर्किए जैसे क्षेत्रों में किए गए हमले इस अस्थिरता को और अधिक बढ़ा रहे हैं जो काफी चिंताजनक है।

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