नवभारत संपादकीय: युद्ध के बीच ऊर्जा संकट गहराया, इथेनॉल का निर्माण व जलसंकट की चुनौती

E85 Fuel India: वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच पेट्रोल-डीजल की कमी से निपटने के लिए ई-20, ई-85 और 100% इथेनॉल ईंधन विकल्पों पर जोर दिया जा रहा है। फ्लेक्स फ्यूल वाहनों की तैयारी तेज हुई।
Navabharat Editorial: Energy Crisis Deepens Amidst War; Ethanol Production and the Challenge of Water Scarcity
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Flex Fuel Vehicle India: ईरान के खिलाफ इजराइल व अमेरिका का युद्ध जारी 5 रहते अभूतपूर्व ऊर्जा संकट व्याप्त हो गया है। पेट्रोल-डीजल की कमी से निपटने के लिए केंद्रीय भूतल परिवहन और महामार्ग मंत्रालय ने वाहनों के लिए 85 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई-85) तथा यहां तक कि 100 प्रतिशत इथेनॉल का विकल्प प्रस्तुत किया है। भारत में अप्रैल 2026 से 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचा जा रहा है जिसे ई-20 कहा जाता है।

केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन को मंजूरी मिलने के बाद फ्लेक्स फ्यूल वाहन चलेंगे जिनमें ई-85 ईधन इस्तेमाल होगा। बाजार में ऐसे वाहन लाने होंगे जो 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चल सकें। इसके लिए वाहनों के इंटर्नल कॉम्बस्टन सिस्टम में सुधार करना होगा तथा ऐसे ऑटो पार्ट लगवाने होंगे जो इथेनॉल से होने वाली क्षति का मुकाबला कर सके। वजह यह है कि इथेनॉल नमी सोखता है और उसकी वजह से टंकी में जंग लग सकता है। वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल 110 डालर प्रति बैरल की ऊंचाई पर जा सकता है। तेल कंपनियां इसे बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी।

आयात किए जाने वाले इंधन की तुलना में इथेनॉल सिर्फ 60.73 से 71,86 रुपए प्रति लीटर पड़ता है जो डिस्टिलरी की ओर से तेल विपणन कंपनियों को दिया जाता है। इथेनॉल निर्माण में बड़े पैमाने पर पानी की जरूरत पड़ती है। 1,000 लीटर गन्ने के रस से जैसे-तैसे 70 लीटर इथेनॉल बनता है। गन्ने की उपज को बहुत ज्यादा सिंचाई करनी पड़ती है।

इसलिए पहले बड़ी मात्रा में गन्ना पैदा करो और फिर उससे इथेनॉल बनाओ। महाराष्ट्र में 350 शक्कर कारखाने हैं जिन्होंने इथेनॉल बनाने के लिए काफी निवेश किया है। यदि चावल व मक्का से इथेनॉल बनाया जाए तो ऐसे 1 टन अनाज से 475 लीटर इथेनॉल निर्मित हो सकता है। पेट्रोल के विकल्प के रूप में इथेनॉल का इस्तेमाल करने पर पानी का संकट उत्पन्न हो सकता है। यदि मानसून ने दगा दिया तो पेयजल का भारी संकट उत्पन्न हो सकता है।

कुछ वर्ष पूर्व लातूर में इतना भयंकर जलसंकट देखा गया था कि ट्रेन से पानी पहुंचने की नौबत आ गई थी। कृषि और उद्योगों के लिए भी भरपूर पानी लगता है। ऐसे में क्या मोटर वाहनों के ईंधन के रूप में इथेनॉल निर्माण के लिए काफी बड़े पैमाने पर पानी का उपयोग किया जाना उचित होगा? अभी पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है।

इसे बढ़ाकर 85 और फिर 100 प्रतिशत करने पर 5 गुना इथेनॉल लगेगा। पेट्रोल-डीजल के उष्मांक की तुलना में इथेनॉल में उतना उष्मांक नहीं रहता। इसलिए गाड़ियों में ज्यादा इथेनॉल भरवाना पड़ेगा। गन्ना और धान दोनों ही फसलों को भरपूर पानी लगता है। इसलिए इथेनॉल का इस्तेमाल इतना बढ़ाना जलसंकट को निमंत्रण दे सकता है। इसका एक उपाय है कि कम पानी में पैदा होने वाली ऐसी फसलों को खोजा जाए जिनसे इथेनॉल बनाया जा सके।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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