

Tulsi Gabbard Says Iran Not Making Nuclear Bomb: अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड हाल ही में सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी के सामने पेश हुई। जहां उन्होंने अपनी लिखित गवाही में कई एक अहम खुलासे किए है। उन्होंने बताया कि 2025 में अमेरिका और इजरायल द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के बाद ईरान की परमाणु संवर्धन (न्यूक्लियर एनरिचमेंट) क्षमता पूरी तरह नष्ट हो गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई के बाद ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता को दोबारा विकसित करने की कोई ठोस कोशिश नहीं की। तुलसी गबार्ड का बयान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे से बिल्कुल अलग है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान तेजी से अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू कर रहा है और कुछ ही हफ्तों में परमाणु हथियार हासिल कर सकता है। ट्रंप ने इसी आधार पर “तत्काल न्यूक्लियर खतरे” का हवाला देते हुए युद्ध शुरू करने का फैसला लिया था।
सीनेट की सुनवाई के दौरान डेमोक्रेट नेताओं ने गबार्ड से सवाल किया कि उन्होंने यह महत्वपूर्ण जानकारी अपने मौखिक बयान में क्यों नहीं दोहराई। इस पर तुलसी गबार्ड ने जवाब दिया कि समय की कमी के कारण कुछ हिस्से पढ़े नहीं जा सके। इस स्पष्टीकरण ने बहस को और तेज कर दिया है। इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख ने भी हाल ही में कहा कि ईरान फिलहाल परमाणु हथियार बनाने के किसी सक्रिय कार्यक्रम में शामिल नहीं है और वह निकट भविष्य में बम बनाने की स्थिति में भी नहीं था। इस बयान ने अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के निष्कर्षों को और मजबूती दी है।
युद्ध को अब लगभग 20 दिन हो चुके हैं और इसके वैश्विक प्रभाव साफ दिखाई देने लगे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ गया है, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी हैं, और भारत सहित कई देशों में महंगाई का दबाव बढ़ रहा है।
इस पूरी स्थिति ने युद्ध की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस तेज हो गई है कि क्या यह युद्ध वास्तविक खतरे की वजह से था या फिर यह एक रणनीतिक, राजनीतिक या शासन परिवर्तन (रिजीम चेंज) की कोशिश थी।
गबार्ड ने सुनवाई के दौरान यह भी चेतावनी दी कि पाकिस्तान, रूस, चीन और उत्तर कोरिया उन्नत मिसाइल प्रणालियों का तेजी से विकास कर रहे हैं, जो अमेरिका के लिए भविष्य में गंभीर खतरा बन सकते हैं।