PMRDA Illegal Construction: पिंपरी-चिंचवड़ में अवैध निर्माणों की बाढ़, PMRDA पर लापरवाही के आरोप

PMRDA Illegal Construction News: पिंपरी-चिंचवड़ और पीएमआरडीए क्षेत्र में अवैध निर्माण तेजी से बढ़ रहे हैं। कार्रवाई के बावजूद हजारों निर्माण मौजूद हैं।कचरा प्रबंधन जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं।
PMRDA Pune Ring Road Land Acquisition
पीएमआरडीए (सौ. सोशल मीडिया )
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PMRDA Illegal Construction Hinjewadi: पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका और पीएमआरडीए क्षेत्र में अनाधिकृत निर्माणों के कारण नागरिक सुविधाओं की स्थिति बिगड़ती जा रही है।

एक ओर जहां महानगरपालिका के नवनियुक्त आयुक्त ने अवैध निर्माणों के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए सख्त कार्रवाई शुरू की है, वहीं दूसरी ओर पीएमआरडीए प्रशासन पर इन निर्माणों को जानबूझकर नजरअंदाज करने के आरोप लग रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों के बीच यह चर्चा तीव्र है कि क्या इस चुप्पी के पीछे कोई आर्थिक साठगांठ या स्वार्थ छिपा है? पीएमआरडीए के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आईटी हब के रूप में पहचाने जाने वाले हिंजवड़ी, मान और मारुंजी क्षेत्र में अवैध निर्माणों की बाढ़ आई हुई है।

अब तक हजारों निर्माणों को नोटिस जारी कर उन्हें 'अनाधिकृत' घोषित किया जा चुका है। जिसमें हिंजवड़ी में लगभग 2,100 निर्माण, मान में 1,450 निर्माण और मारुंजी में 980 निर्माण शामिल हैं।

पिछले 3 वर्षों का कार्रवाई विवरण

यद्यपि प्राधिकरण ने पिछले कुछ समय में कार्रवाई तेज की है, लेकिन निर्माणों की विशाल संख्या के सामने यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। 2023-24 में 382 निर्माण कार्यों पर कार्रवाई की गयी। उसी तरह 2024-25 में 456 निर्माण कार्य और 2025-26 (अप्रैल तक) 412 निर्माण कार्यों पर की गयी है। इन कार्रवाइयों के अंतर्गत आवासीय इमारतों के साथ-साथ व्यवसायिक शेड, भव्य शोरूम और होटल भी शामिल हैं। विशेष रूप से हिंजवड़ी आईटी पार्क क्षेत्र में 112 बड़े निर्माण और मान गांव में आरक्षित भूमि पर बने 85 ढांचों को हटाया गया है।

जुर्माना और वित्तीय वसूली

पिछले 3 वर्षों में पीएमआरडीए ने कुल 42।5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। हालांकि, इसमें से अब तक केवल 18।7 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है। शेष राशि वसूलने के लिए प्राधिकरण ने संबंधित संपत्तियों के 7/12 उतारे (भूमि रिकॉर्ड) पर बोजा चढ़ाने (बोझा दर्ज करने) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अवैध निर्माण की लिखित शिकायते देने के बावजूद अधिकारी कार्रवाई करने में रुचि नहीं दिखाते।

अवैध निर्माण से उत्पन्न हो रहा भारी संकट

  • सड़कों के संकुचित होने से भारी ट्रैफिक जाम
  • एंबुलेस और दमकल जैसी आपातकालीन सेवाओं के लिए मार्ग का अभाव
  • अपशिष्ट प्रबंधन (कचरा) और जलापूर्ति की गंभीर समस्या
  • जनसंख्या घनत्व बढ़ने से बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव

पुणे से नवभारत लाइव के लिए अमोल येलमार की रिपोर्ट

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