चंदन गुप्ता हत्याकांड में आजीवन सजा काट रहे सलीम की मौत, इलाज के दौरान KGMU में गई जान

Chandan Gupta Murder Case: चंदन गुप्ता हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे मुख्य आरोपी सलीम का लखनऊ जेल के अस्पताल में मौत हो गई।
चंदन गुप्ता हत्याकांड में आजीवन सजा काट रहे सलीम की मौत, इलाज के दौरान KGMU में गई जान
चंदन गुप्ता हत्याकांड में आजीवन सजा काट रहे सलीम की मौत, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Kasganj Incident 2018: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में तिरंगा यात्रा के दौरान चंदन की हत्या के मामले में दोषी सलीम शेख़ का केजीएमयू लखनऊ में इलाज के दौरान बुधवार को मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सलीम शेख पिछले लगभग दो महीनों से अस्पताल में भर्ती था और लंबे समय से डायलिसिस पर चल रहा था।

जानकारी के अनुसार, सलीम एक महीने पहले ही जेल से पैरोल पर रिहा हुआ था। हाल ही में उसे इलाज के लिए उसे कासगंज से लखनऊ जेल स्थानांतरित किया गया था।

आजीवन कारावास की काट रहा था सजा

सलीम 2018 में कासगंज में तिरंगा यात्रा के दौरान हुई हिंसा में चंदन गुप्ता की हत्या में शामिल था। लखनऊ की एनआईए स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में सलीम समेत 27 अन्य दोषियों को दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट के फैसले के बाद सलीम ने अन्य दोषियों के साथ आत्मसमर्पण किया और तब से जेल में था।

26 जनवरी 2018 को कासगंज में निकाली गई थी यात्रा

बता दें कि 26 जनवरी 2018 को कासगंज में एक भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई थी। चंदन गुप्ता अपने भाई विवेक गुप्ता और अन्य साथियों के साथ इस यात्रा में शामिल थे। जैसे ही तिरंगा यात्रा कासगंज के तहसील रोड पर स्थित जीजीआईसी गेट के पास पहुंची, रास्ता रोकने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बताया गया कि सलीम, वसीम और नसीम सहित कुछ लोगों ने रास्ता रोकने का प्रयास किया जिसके बाद चंदन गुप्ता ने आपत्ति जताई, जिससे तनाव बढ़ गया और पथराव शुरू हो गया। इसी दौरान तिरंगा यात्रा के दौरान गोलीबारी की घटना भी हुई।

घटना के बाद एक सप्ताह तक लगा रहा कर्फ्यू

मुख्य आरोपी सलीम ने चंदन गुप्ता पर गोली चलाई, जिससे उनकी मौत हो गई। इस घटना ने शहर में हड़कंप मचा दिया और हालात इतने बिगड़े कि लगभग एक सप्ताह तक कर्फ्यू लगाया गया और इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं। करीब छह साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद, जनवरी 2025 में चंदन गुप्ता के परिवार को न्याय मिला। एनआईए की विशेष अदालत ने इस मामले में 28 आरोपियों को आजीवन जेल की सजा सुनाई थी, जबकि दो आरोपियों को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिए गया था।

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