
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
नवभारत डिजिटल डेस्क: वेनेजुएला के राष्ट्रपति का अपहरण कर वहां के तेल भंडार पर कब्जा करनेवाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अब डेनमार्क के स्वायत्तशासी क्षेत्र ग्रीनलैंड को हथिया कर पश्चिमी गोलार्ध पर कब्जा जमाना चाहते हैं उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता है और इसके लिए सेना के इस्तेमाल का विकल्प खुला है।
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर कोई देश ग्रीनलैंड को लेकर उनकी योजना का विरोध करेगा तो अमेरिका उस पर टैरिफ लगा सकता है। अमेरिका के दबाव के खिलाफ डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन व अन्य शहरों में हजारों लोगों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया और नारे लगाए कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है।
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर व यूरोपीय संघ ने ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की टैरिफ धमकी की कड़ी आलोचना की। ट्रंप के कदम विश्व में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। यदि अमेरिका यह ऐलान रहे हैं। यदि अमेरिका यह ऐलान करता है कि पश्चिमी गोलार्ध उसका विशिष्ट क्षेत्र है तो चीन भी खुद को एशिया का सर्वेसर्वा बताने लगेगा जिसे भारत, जापान, दक्षिण कोरिया व फिलीपीन्स नापसंद करेंगे।
ट्रंप की विस्तारवादी नीति के खिलाफ दक्षिण अमेरिका के देश एकजुट हो सकते हैं। यूरोप ने हमेशा अमेरिका का साथ दिया था। अफगानिस्तान में अमेरिका के नेतृत्ववाली नाटो सेना ने जब कार्रवाई की थी तब डेनमार्क के 43 सैनिक वहां शहीद हुए थे।
आज उसी डेनमार्क के क्षेत्र ग्रीनलैंड को ट्रंप छीनना चाहते हैं। जर्मनी, फ्रांस, नार्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड, नीदरलैंड जैसे देशों ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए अपनी सेनाएं भेज दी हैं।
नाटो संधि का अनुच्छेद 5 कहता है कि किसी भी एक सदस्य देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। क्या डेनमार्क इस अनुच्छेद का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ करेगा? ट्रंप ने कहा है कि वह आसानी से या सख्ती से ग्रीनलैंड लेकर ही रहेंगे।
अपने पिछले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने 2019 में ग्रीनलैंड खरीदने की बात कही थी। इस समय वह सुरक्षा और आर्थिक पहलुओं की दलील देकर वहां कब्जा करना चाहते हैं। वेनेजुएला पर सैनिक ऑपरेशन कर उन्होंने दिखा दिया कि वह अपनी मर्जी से जो चाहे कर सकते हैं।
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यूरोपीय यूनियन में शामिल 27 देशों के राजदूतों की आपात बैठक में अमेरिका की टैरिफ धमकी पर चर्चा की गई। बहुत कम आबादीवाले ग्रीनलैंड के तेल भंडार और दुर्लभ खनिज पर ट्रंप की निगाहें लगी हुई हैं।
इसके अलावा उत्तर अमेरिका व आर्कटिक के बीच मिसाइल हमले की चेतावनी सिस्टम तैनात करने तथा नौसैनिक हलचलों की निगरानी करने के लिए ट्रंप सुरक्षा के लिहाज से ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं। ऐसा कदम उठाते हुए उन्हें यूरोपीय सहयोगी देशों की नाराजगी की चिंता नहीं है। इससे नाटो संधि भी टूट सकती है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा






