हमें किसी से परमिशन की जरूरत नहीं...रूसी तेल खरीद पर सरकार का बड़ा बयान, अमेरिका ने दी थी 30 दिन की इजाजत

Middle-East Conflict: रूसी तेल आयात पर अमेरिकी छूट के दावों पर भारत ने करारा जवाब दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि रूसी तेल खरीदने के लिए भारत को किसी की अनुमति नहीं चाहिए और यह आयात जारी रहेगा।
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Russian Oil Import: रूसी तेल आयात पर अमेरिकी छूट के दावों पर भारत ने करारा जवाब दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि रूसी तेल खरीदने के लिए भारत को किसी की अनुमति नहीं चाहिए और यह आयात जारी रहेगा। ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही रोकने की चेतावनी के बाद दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है।

पीआईबी के बयान के अनुसार, नई दिल्ली तेल खरीद के लिए अल्पकालिक छूट पर निर्भर नहीं है। सरकार ने साफ किया कि भारत रूसी तेल आयात के लिए किसी की अनुमति का मोहताज नहीं रहा है। फरवरी 2026 में भी खरीद जारी है और रूस हमारा सबसे बड़ा सप्लायर है। वाशिंगटन ने हाल ही में भारतीय निर्यात से पच्चीस प्रतिशत ड्यूटी हटाई थी, जिसे उसने भ्रामक तरीके से रूसी तेल न खरीदने की भारत की 'प्रतिबद्धता' बताया था। इसके बाद बीते कल 30 दिनों के लिए छूट देना का ऐलान किया था।

250 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल भंडार

बयान के मुताबिक, आपात स्थिति के लिए भारत के पास 250 मिलियन बैरल से अधिक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार है। इसके बावजूद शनिवार को घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर साठ रुपये और कमर्शियल सिलेंडर महंगे किए गए हैं। वैश्विक स्तर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'ईरान के बिना शर्त आत्मसमर्पण' वाले बयान के बाद इस हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में करीब तीस प्रतिशत और केवल शुक्रवार को साढ़े आठ प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया है।

किसी की अनुमति पर निर्भर नहीं: सरकार

पीटीआई के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने विपक्षी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत रूसी तेल के लिए किसी की अनुमति पर निर्भर नहीं है। अमेरिकी छूट रिफाइनरियों का टकराव कम करती है, लेकिन देश की नीतियां तय नहीं करती। अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी आपत्तियों के बावजूद भारत में रूसी तेल आता रहा। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा 2013 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच तेल आयात में किए गए समायोजन का भी उदाहरण दिया।

दूसरी तरफ रूस ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वह भारत को होने वाले कच्चे तेल निर्यात के आंकड़े 'बुरा चाहने वालों' से छिपाकर रखेगा। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव का यह बयान अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें भारतीय रिफाइनरियों को तीस दिन की छूट देने की बात थी। पेसकोव ने साफ कहा कि वे स्पष्ट कारणों से तेल की मात्रा का कोई आंकड़ा नहीं देंगे, क्योंकि दुनिया में उनके बहुत से विरोधी मौजूद हैं।

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