महाभारत में सबसे ज्यादा दुख किसने झेला? अशिष्टता, अन्याय और युद्ध की सबसे बड़ी शिकार थीं ये महिलाएं

Women of Mahabharata: महाभारत को अक्सर वीरता, धर्म और युद्ध की कथा के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसके भीतर छिपा एक कड़वा सच यह भी है कि इस महाकाव्य की सबसे बड़ी पीड़ित महिलाएं थीं।
most in the Mahabharata women were the greatest victims of rudeness, injustice, and war.
Bhanumati (Source. Pinterest)
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Mahabharata Injustice: महाभारत को अक्सर वीरता, धर्म और युद्ध की कथा के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसके भीतर छिपा एक कड़वा सच यह भी है कि इस महाकाव्य की सबसे बड़ी पीड़ित महिलाएं थीं। जब सवाल उठता है कि महाभारत में सबसे अशिष्ट या अन्यायी चरित्र कौन था, तो जवाब किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा दौर और उसकी सोच कटघरे में खड़ी होती है।

भानुमति: जिसे किस्मत ने तोड़ दिया

भानुमति, दुर्योधन की पत्नी, एक बुद्धिमान और कोमल स्वभाव की राजकुमारी थीं। उन्हें कर्ण की मदद से जबरन स्वयंवर से उठाकर हस्तिनापुर लाया गया। वह दुर्योधन से विवाह नहीं चाहती थीं, फिर भी उन्हें यह जीवन स्वीकार करना पड़ा। दुर्योधन ने भले ही निजी रूप से उनका सम्मान किया हो, लेकिन जिन पापों का वह हिस्सा बना, उनकी छाया भानुमति के जीवन पर भी पड़ी। द्रौपदी चीरहरण जैसे अपमानजनक कृत्य को देखकर एक स्त्री के रूप में उनका मन टूट गया होगा, लेकिन विरोध करने की कोई शक्ति उनके पास नहीं थी। अंततः युद्ध में पति और पुत्र की मृत्यु, बेटी का दुखद जीवन और फिर पति की चिता में कूद जाना यह सब भानुमति की त्रासदी बन गया।

कुरु वंश की महिलाएं: युद्ध की अनदेखी शिकार

असल में देखा जाए तो महाभारत की लगभग सभी कुरु महिलाएं दुर्भाग्य की प्रतीक थीं। कौरवों की पत्नियां विधवा हो गईं, उनके पुत्र मारे गए और बेटियां युद्ध के कारण टूटे रिश्तों का बोझ ढोती रहीं। कर्ण की पत्नियों ने पति और नौ पुत्रों की मृत्यु के बाद शोक में जीवन बिताया। इन स्त्रियों की पीड़ा इतिहास के पन्नों में अक्सर अनदेखी रह गई।

द्रौपदी: पंचकन्या, पर सुख से वंचित

द्रौपदी पंचकन्या थीं, फिर भी उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। कुरुसभा में उनका अपमान हुआ, दुशासन ने निर्वस्त्र करने की कोशिश की, कर्ण ने उन्हें अशिष्ट महिला कहा और उनके पांचों पुत्र युद्ध में मारे गए। एक वर्ष तक उन्हें दासी बनकर रहना पड़ा। "भगवान कृष्ण का धन्यवाद जो द्रौपदी को बचाने आए।" यदि कृष्ण न होते, तो धर्म भी मौन रह जाता।

सुभद्रा और अन्य पांडव पत्नियां

सुभद्रा को अपमान नहीं सहना पड़ा, लेकिन उनका पुत्र अभिमन्यु युद्ध में मारा गया और बहू विधवा हो गई। उन्हें वर्षों तक अपने परिवार से दूर रहना पड़ा। हिडिम्बा, वल्लंधरा, देविका जैसी अन्य पत्नियां भी पांडवों के साथ सामान्य पारिवारिक जीवन नहीं जी सकीं।

असली प्रश्न: अशिष्ट कौन था?

कुछ लोग कर्ण को सबसे दुखी चरित्र मानते हैं, लेकिन सवाल यह है कि जिसने कुरुसभा में द्रौपदी के अपमान का समर्थन किया, क्या वह निर्दोष था? "कर्ण ने दुशासन से कहा था कि वह कुरुसभा के भीतर द्रौपदी का वध कर दे।" यही वह क्षण था, जिसने उसके चरित्र की सच्चाई उजागर कर दी।

ध्यान दें

महाभारत की महिलाएं द्रौपदी, सुभद्रा, रुक्मिणी, कुंती, हिडिम्बा महलों की रानियां नहीं, बल्कि संघर्ष की प्रतीक थीं। उन्होंने अपमान, युद्ध और अकेलेपन के बीच भी अपने परिवार और धर्म को थामे रखा। असल में, महाभारत की सबसे बड़ी त्रासदी यही थी कि स्त्रियों के पास निर्णय का अधिकार नहीं था, लेकिन सहनशक्ति सबसे अधिक उन्हीं में थी।

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