बच्चा हो गया है जिद्दी? पढ़ाई में नहीं लगता मन? इस विधि से करें मां यशोदा की पूजा, मिलेगी जल्द निजात

Yashoda Jayanti Significanc: बच्चा जिद्दी है या पढ़ाई में मन नहीं लग रहा? मां यशोदा की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से स्वभाव में सुधार और एकाग्रता बढ़ने की मान्यता है। जानें आसान विधि।
Yashoda Jayanti Remedies
यशोदा जयंती (सौ.सोशल मीडिया)
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Yashoda Jayanti Remedies: आज यशोदा जयंती मनाया जा रहा है। मातृत्व और वात्सल्य का प्रतीक यशोदा जयंती के दिन भगवान श्रीकृष्ण की मैया यशोदा की पूजा करने से सभी संकटों का निवारण होता है। साथ ही यह उन माता-पिता के लिए बहुत खास दिन है, जिनकी संतान किसी भी तरह के शारीरिक, मानसिक समस्या से जूझ रही है।

ऐसी मान्यता है कि यशोदा माता की पूजा करने से न केवल कान्हा का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि बच्चों के जीवन में आने वाली तमाम बाधाएं भी दूर हो जाती हैं, तो आइए इस पर्व से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

यशोदा जयंती क्यों खास है

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जयंती के दिन पूजा करने से कुंडली में संतान पक्ष मजबूत होता है। अगर आपका बच्चा बहुत अधिक जिद्दी है, उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता, या वह बार-बार बीमार पड़ता है, तो मैया यशोदा की पूजा-अर्चना करने से ऐसे सभी तरह के दोषों से छुटकारा मिलता है। इसके साथ ही भगवान कृष्ण की कृपा मिलती है।

यशोदा जयंती का महत्व

यशोदा जयंती मातृत्व, ममता और निस्वार्थ प्रेम का पर्व है। यह दिन मां यशोदा की उस भावना को समर्पित है, जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का पालन-पोषण अपार स्नेह और समर्पण से किया। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से घर-परिवार में सुख, शांति और प्रेम बढ़ता है। खासकर संतान की इच्छा रखने वाली महिलाएं इस दिन मां यशोदा से आशीर्वाद मांगती हैं। माना जाता है कि उनकी कृपा से संतान-सुख और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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यशोदा जयंती के दिन माताएं अवश्य करें ये उपाय

  • नजर दोष के लिए

अगर आपके बच्चे को जल्दी नजर लगती है, तो मैया यशोदा को काली गुंजा या काले धागे चढ़ाएं। फिर उसे पूजा के बाद बच्चे की कलाई पर बांध दें।

  • एकाग्रता के लिए

पढ़ाई में मन न लगने पर इस दिन बच्चों के हाथों से जरूरतमंद छोटे बच्चों को दूध या सफेद मिठाई का दान कराएं।

  • स्वास्थ्य के लिए

अगर आपका बच्चा बीमार रहता है, तो माता यशोदा के चरणों में केसर अर्पित करें। फिर उसका तिलक रोज बच्चे के माथे पर लगाएं।

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