
माघ पूर्णिमा पर 'रवि पुष्य योग'(सौ.सोशल मीडिया)
Ravi Pushya Nakshatra 2026: रविवार, 1 फरवरी 2026 को माघ महीने की पूर्णिमा है। ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह शुभ तिथि वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जा रहा है। इस दिन माघ पूर्णिमा होने के साथ-साथ पुष्य संयोग योग का भी बन रहा है।
ज्योतिषियों का कहना है कि, इस साल माघ पूर्णिमा की शुभ तिथि रविवार को पड़ने के कारण इसे रवि पुष्य योग कहा जाएगा। रविवार, पुष्य नक्षत्र और पूर्णिमा तिथि इन तीनों का एक साथ होना शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना गया है।
इसे सोने में सुहागा जैसा योग कहा जाता है। इस दिन कुछ खास उपायों को करके आप शुभ फलों की प्राप्ति कर सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं रवि पुष्य नक्षत्र क्यों है खास और कौन से उपाय करना होगा लाभप्रद साबित हो सकता है?
रवि पुष्य योग का महत्व गुरु पुष्य योग के समान माना गया है। अगर रवि पुष्य योग पूर्णिमा को पड़ रहा है, तो इसका प्रभाव कई गुना अधिक बढ़ जाता है। इसलिए इस दिन का पूर्ण रूप से प्रयोग करें।
ज्योतिषियों की मानें तो, पंचांग के अनुसार, रवि पुष्य नक्षत्र के बारे में जान लेना ही पर्याप्त नहीं है। बल्कि इस दिन के अन्य शुभ-अशुभ मुहूर्तों का भी जानना बेहद जरूरी है। बता दें कि 1 फरवरी को भद्रा और राहुकाल का साया रहेंगा।
इस दिन भद्रा योग शाम तक प्रभाव रहेगी और जैसे ही वह खत्म होंगी, तो राहुकाल आरंभ हो जाएगा। ऐसे में पूरे दिन को शुभ मान लेना ज्योतिषीय दृष्टि से सही नहीं है।
धार्मिक ग्रथों में भद्राकाल को भी शुभ नहीं माना जाता है। इसे यम और शनि की बहन कहा गया है। ऐसे में इस दौरान किए गए कार्य में सफलता नहीं मिलती है या फिर किसी न किसी तरह की समस्याया आती रहती है। इसलिए इस दिन भी पंचांग देखकर ही कोई शुभ काम करें।
ज्योतिषियों का कहना है कि, पुष्य नक्षत्र में शादी-विवाह को छोड़कर कोई भी शुभ और मांगलिक काम कर सकते हैं।
इस दिन सोलह संस्कार यानी मुंडन संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार, यज्ञोपवीत संस्कार आदि से लेकर पूजा-पाठ, व्यापार या दुकान आदि शुरू कर सकते हैं।
इसके अलावा, इस दिन रत्न धारण करने से लेकर इष्ट सिद्धि और मंत्र सिद्धि करना लाभकारी हो सकता है।
पंचांग के अनुसार, 1 फरवरी 2026 को भद्रा और राहुकाल रहने वाला है। ऐसे में आप सूर्योदय से पहले शुभ काम करें। इस अवधि में रवि पुष्य का सबसे अधिक प्रभाव होगा।
इसके अलावा दूसरा समय है अभिजीत मुहूर्त। अभिजीत मुहूर्त को भद्रा के दुष्प्रभाव को समाप्त करने वाला माना गया है। अभिजीत मुहूर्त – 12:18 पीएम – 01:02 पीएम सूर्योदय – 7:10 ए एम
ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा गया है। आकाश में 27 नक्षत्र है जिसमें से इसे 8वां नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी शनि और अधिष्ठाता देवता गुरु बृहस्पति है। इसके साथ ही कर्क राशि है।
इसी के कारण कर्क राशि पर सभी देवताओं की विशेष कृपा मानी जाती है। कर्मफल दाता शनि को समृद्धि, स्थायित्व, न्याय और उच्च पद देने वाला ग्रह माना जाता है। इसलिए जिन लोगों का जन्म पुष्य नक्षत्र में या कर्क राशि में हुआ है, तो वह आने वाले समय में काफी प्रसिद्दि पाते हैं।
रवि पुष्य नक्षत्र में विवाह के अलावा कोई भी शुभ काम कर सकते हैं। इसके पीछे एक शास्त्रीय शाप माना जाता है। इस शाप के अनुसार पुष्य नक्षत्र में विवाह नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस नक्षत्र को स्वयं ब्रह्मा जी से शाप दिया था। इसका उल्लेख शिव पुराण में मिलता है।
गणेश जी की पूजा अगर किसी जातक का जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ था, तो इस दिन भगवान गणेश की पूजा अवश्य करें। इसके साथ ही एक चम्मच शहद और दही का सेवन करने के साथ शुभ काम का आरंभ करें।
रवि पुष्य नक्षत्र के दिन सूर्योदय से पहले घी का दीपक जलाएंगे और 108 बार इस मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से आपकी कई इच्छाएं पूरी हो सकती है। रोग, दोष, भय के साथ-साथ कानूनी माममों से निजात मिल सकती है।
मंत्र -अक्षरं परमं ब्रह्म ज्योति रूपं सनातनम्
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अगर घर में बेकार में अशांति बनी रहती हैं और पितरों की कृपा पाना चाहते हैं, तो रवि पुष्य नक्षत्र को एक आटे का दीपर बनाकर दो बाती लगा लें और गाय का घी भर दें।
इसके बाद अपने पितरों का स्मरण करते हुए इसे जला दें। इसके साथ ही श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पाठ आरंभ करें और उसे समस्त पितृ देवताओं को समर्पित करें। तिल का करें ये उपाय रवि पुष्य नक्षत्र को पूजा करने के बाद एक लोटे में जल लें और थोड़ा सा काला तिल डाल लें।
इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके पीपल या फिर कोई अन्य पवित्र पेड़ पर अर्पित कर दें।






