Allahabad High Court Mathura hearing updates: मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि–शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े 18 अलग-अलग वादों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई एक बार फिर टल गई है। न्यायमूर्ति अविनाश सक्सेना की अदालत में चल रहे इस संवेदनशील मामले में अब अगली कानूनी बहस 20 फरवरी 2026 को होगी। अदालत ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) और पक्षकारों द्वारा दाखिल विभिन्न प्रार्थना पत्रों को देखते हुए लिया है। फिलहाल मामला इशू फ्रेमिंग यानी कानूनी मुद्दों को तय करने के अहम चरण में पहुंच रहा है।
सुनवाई के दौरान वाद संख्या चार में वादी संख्या तीन से पांच की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्रों पर चर्चा हुई। इनमें ऑर्डर 1 रूल 10 के तहत भारत सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को पक्षकार बनाने की मांग की गई है। अदालत ने यह भी नोट किया कि प्रतिवादी वक्फ बोर्ड और शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी की ओर से अब तक इन आवेदनों पर कोई लिखित आपत्ति दाखिल नहीं की गई है, जिस पर उन्हें अतिरिक्त समय दिया गया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित SLP सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण वह फिलहाल किसी निर्णायक आदेश से पहले शीर्ष अदालत के निर्देशों का इंतजार करेगा। अदालत ने 20 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजे अगली सुनवाई तय करते हुए सभी पक्षों को आवश्यक दस्तावेज और आपत्तियां रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया है।
Allahabad High Court Mathura hearing updates: मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि–शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े 18 अलग-अलग वादों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई एक बार फिर टल गई है। न्यायमूर्ति अविनाश सक्सेना की अदालत में चल रहे इस संवेदनशील मामले में अब अगली कानूनी बहस 20 फरवरी 2026 को होगी। अदालत ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) और पक्षकारों द्वारा दाखिल विभिन्न प्रार्थना पत्रों को देखते हुए लिया है। फिलहाल मामला इशू फ्रेमिंग यानी कानूनी मुद्दों को तय करने के अहम चरण में पहुंच रहा है।
सुनवाई के दौरान वाद संख्या चार में वादी संख्या तीन से पांच की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्रों पर चर्चा हुई। इनमें ऑर्डर 1 रूल 10 के तहत भारत सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को पक्षकार बनाने की मांग की गई है। अदालत ने यह भी नोट किया कि प्रतिवादी वक्फ बोर्ड और शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी की ओर से अब तक इन आवेदनों पर कोई लिखित आपत्ति दाखिल नहीं की गई है, जिस पर उन्हें अतिरिक्त समय दिया गया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित SLP सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण वह फिलहाल किसी निर्णायक आदेश से पहले शीर्ष अदालत के निर्देशों का इंतजार करेगा। अदालत ने 20 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजे अगली सुनवाई तय करते हुए सभी पक्षों को आवश्यक दस्तावेज और आपत्तियां रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया है।






