महिला आरक्षण का समर्थन लेकिन परिसीमन पर सवाल...नवीन पटनायक ने ओड़िशा के CM को लिखा पत्र; रखी यह मांग

Odisha News: पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने CM मोहन माझी को एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया है लेकिन वहीं परिसीमन को लेकर उन्होंने चिंता जताई है।
Odisha News: Naveen Patnaik Letter To Odisha CM On Nar Shakti Adhiniyam
नवीन पटनायक (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Naveen Patnaik Letter to Odisha CM On Women Reservation:  ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन करते हुए कहा कि बीजू बाबू हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रबल समर्थक रहे हैं और उन्होंने पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण देने की शुरुआत की थी।

पत्र में ओडिशा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि राज्य का गठन 1 अप्रैल 1936 को भाषा के आधार पर हुआ था। यह भारत का पहला राज्य था, जिसे ओड़िया भाषा के आधार पर बनाया गया, ताकि ओड़िया भाषी लोगों को एकजुट किया जा सके।

पत्र में क्या लिखा?

नवीन पटनायक ने आगे कहा कि ओडिशा का निर्माण लंबे संघर्ष और बलिदानों का परिणाम है जिसमें कई दूरदर्शी नेताओं और आम लोगों ने ओड़िया पहचान को बचाने के लिए योगदान दिया। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि ओडिशा ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 1817 के पाइक विद्रोह से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक कई महान नेताओं ने आजादी की लड़ाई में योगदान दिया, जिनमें बक्सी जगबंधु, वीर सुरेन्द्र साय और गोपबंधु दास प्रमुख हैं। इसके अलावा 12 वर्षीय शहीद बाजी राउत को साहस का प्रतीक बताया गया।

पत्र में जगन्नाथ संस्कृति का उल्लेख

पत्र में जगन्नाथ संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह भारत की समावेशी और विविधता वाली परंपरा को मजबूत करती है और समानता, भाईचारा और करुणा जैसे मूल्यों को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत को ओडिशा की संस्कृति, साहस और संसाधनों से शक्ति मिलती है। राज्य के खनिज, बंदरगाह और ऊर्जा संसाधन राष्ट्रीय विकास में अहम योगदान देते हैं।

परिसीमन को लेकर जताई चिंता

इसके साथ ही पत्र में प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, यानी परिसीमन विधेयक को लेकर चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि इस विधेयक के तहत लोकसभा की संरचना बदलने और सदस्यों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। नवीन पटनायक के अनुसार, वर्तमान में ओडिशा के 21 सांसद हैं, जो लगभग 3.9 प्रतिशत प्रतिनिधित्व है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो संख्या 29 तक बढ़ सकती है, लेकिन अनुपात घटकर 3.4 प्रतिशत रह जाएगा। इससे ओडिशा के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में लगभग 15 प्रतिशत की कमी हो सकती है।

परिसीमन की वजह से प्रदेश की आवाज कमजोर होगी- नवीन पटनायक

नवीन पटनायक ने आगे लिखा कि इससे राज्य की राजनीतिक आवाज कमजोर होगी और यह संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ होगा। पत्र में यह भी कहा गया कि ओडिशा को इस प्रक्रिया में चौथा सबसे अधिक नुकसान झेलने वाला राज्य बताया गया है। नवीन पटनायक ने कहा कि बीजेडी महिला आरक्षण कानून का समर्थन करती है, लेकिन परिसीमन विधेयक का समर्थन तभी किया जाएगा जब ओडिशा के राजनीतिक अधिकार सुरक्षित रहें। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे को गंभीरता से अंदर और 48 घंटों के भीतर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने कहा कि ओडिशा के राजनीतिक अधिकारों में किसी भी प्रकार की कमी स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। बीजेडी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर राज्य के हितों की रक्षा के लिए सरकार के साथ खड़ी रहेगी।

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