खराब स्थिति में भी पैसेवारी उत्तम, जिले की अनुमानित पैसेवारी 63 पैसे दर्ज, राहत से वंचित किसान

Wardha News: वर्धा जिले में इस साल खरीफ मौसम में भारी बारिश तथा बीमारी, कीट का प्रकोप आदि से जिले की फसलों का बड़ा नुकसान हुआ है। इससे किसान आर्थिक संकट में घिर गया है।
Wardha News: वर्धा जिले में इस साल खरीफ मौसम में भारी बारिश तथा बीमारी, कीट का प्रकोप आदि से जिले की फसलों का बड़ा नुकसान हुआ है। इससे किसान आर्थिक संकट में घिर गया है।
वर्धा न्यूज
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Wardha News: वर्धा जिले में इस साल खरीफ मौसम में अत्यधिक बारिश तथा बीमारी, किट का प्रकोप आदि से जिले में फसलों का भारी नुकसान हुआ है। इससे किसान आर्थिक संकट में घिर गया है। लागत खर्च निकलना मुश्किल है। सर्वत्र स्थिति बिकट बनी है। इन सब के बावजूद प्रशासन द्वारा हालही में जारी की गई अनुमानित रिपोर्ट में पैसेवारी 63 पैसे दर्ज की गई है। जोकि उत्तम बताई गई है।

परिणामवश सरकार द्वारा मिलने वाली अतिरिक्त राहत से जिले के किसानों पर वंचित रहने की नौबत आ सकती है। इससे जिले के किसानों में असंतोष व्यक्त हो रहा है। इस बार मानसून ने देरी से जिले में दस्तक दी। रुक-रुक कर हुई बारिश में जिले के किसानों ने किसी तरह बुआई निपटा ली। जुलाई में अच्छी बारिश हुई़ अगस्त व सितंबर माह में भी अतिवृष्टि दर्ज की गई।

फसल पर बुरा असर

इसका बुरा असर फसल पर देखा गया। कुछ जगह अत्यधिक वर्षा से फसल व जमीन बह गई। सोयाबीन पर बीमारी व किट का प्रकोप रहा। सितंबर के अंत तक लौटती बारिश ने कहर बरपाया। बड़ी मात्रा में फसल खराब होने से किसान आर्थिक संकट में घिर गया। ऐसी स्थिति में अनुमानित पैसेवारी 50 पैसे से अधिक दर्ज होने के कारण जिले के किसानों को अतिरिक्त राहत नहीं मिलेगी, ऐसा चित्र है।

नवंबर में सुधारित, तो दिसंबर में अंतिम पैसेवारी

खरीफ फसल की पैसेवारी राजस्व विभाग व कृषि विभाग की मदद से प्रतिवर्ष घोषित की जाती है। पैसेवारी का संबंध सुखा स्थिति से आता है। अल्प पर्जन्यमान अथवा अधिक बारिश के बाद फसल के उत्पादकता पर परिणाम पैसे के स्वरूप में प्रकट करने का सूत्र हैं। प्रतिवर्ष सितंबर माह में नजरअंदाज पैसेवारी, अक्टूबर माह में सुधारित तथा दिसंबर माह में फसल की अंतिम पैसेवारी घोषित की जाती है। वर्तमान में पैसेवारी की प्रथम रिपोर्ट आयी है। अंतिम पैसेवारी अहम मानी जा रही है।

1,339 गांवों में 50 से अधिक पैसेवारी

ज्ञात हो कि, पैसेवारी 50 प्रश से नीचे आने पर फसल स्थिति गंभीर व 50 प्रश से अधिक आने पर फसल स्थिति उत्तम, ऐसा पैसेवारी का समीकरण है। जिले में 1,387 गांवों में से बुआई न हुए गांव छोड़कर खरीफ फसल के लिए पात्र 1,339 गांवों में अनुमानित पैसेवारी औसतन 63 पैसे दर्ज की गई है। परंतु जिले में प्रत्यक्ष फसल स्थिति व दर्ज पैसेवारी में भारी अंतर दिखाई दे रहा है। 50 प्रश से कम एक भी गांव में पैसेवारी दर्ज न होने से किसान असंतोष व्यक्त कर रहे है।

तहसील गांव पैसेवारी
वर्धा 154 63 पैसे
सेलू 166 57 पैसे
देवली 148 64 पैसे
आर्वी 208 56 पैसे
आष्टी 136 72 पैसे
कारंजा 120 68 पैसे
हिंगनघाट 188 62 पैसे
समुद्रपुर 219 62 पैसे
कुल 1339 63 पैसे
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