Akola: धुआंधार बारिश से जनजीवन प्रभावित, खरीफ फसलों को नुकसान, बांधों में जलस्तर लबालब

Akola News: अकोला जिले में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। भारतीय मौसम विभाग ने अकोला, वाशिम, बुलढाना के साथ साथ राज्य के अन्य कई जिलों में यलो अलर्ट जारी किया था।
Akola News: अकोला जिले में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। भारतीय मौसम विभाग ने अकोला, वाशिम, बुलढाना के साथ साथ राज्य के अन्य कई जिलों में यलो अलर्ट जारी किया था।
सांकेतिक तस्वीर (सौजन्य-नवभारत)
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Heavy Rainfall in Akola: अकोला जिले में शनिवार दोपहर शहर के साथ साथ जिले के कुछ हिस्सों में अचानक हुई धुआंधार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। वैसे सुबह से ही रिमझिम बारिश शुरू थी लेकिन दोपहर में अचानक जोरदार बारिश शुरू हो गयी। जिससे शहर में जनजीवन प्रभावित हो गया। मौसम विभाग के अनुसार यह बारिश मानसून के अंतिम चरण की है, लेकिन इसके प्रभाव ने किसानों और आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है।

भारतीय मौसम विभाग की मुंबई वेधशाला ने अकोला, वाशिम, बुलढाना के साथ साथ राज्य के अन्य कई जिलों में यलो अलर्ट जारी किया था। तदनुसार जिले में भारी बारिश दर्ज की गयी है। शहर और जिले के कुछ हिस्सों में शनिवार की दोपहर अचानक हुई धुआंधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। इस तेज बारिश ने लोगों को एक बार फिर सावधानी बरतने पर मजबूर कर दिया है।

धीमी पड़ी रफ्तार

कुछ सड़कों पर पानी भर गया, जिससे यातायात बाधित हुआ और दूकानों, घरों में भी पानी घुसने की घटनाएं सामने आईं। बारिश का असर केवल शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव देखा गया। खेतों में पानी भरने से खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। तेज बारिश के कारण जनजीवन की रफ्तार धीमी पड़ गई है, और लोग एक बार फिर मौसम की मार से जूझने को मजबूर हैं।

खेतों में भर गया पानी

किसानों के अनुसार इस समय फसलों को बारिश की आवश्यकता नहीं है। खेतों में पानी भरने से सोयाबीन, कपास, तुअर और अन्य खरीफ फसलें सड़ने लगी हैं। कई क्षेत्रों में खेतों में पानी जमा हो गया है, जिससे फसलें खराब होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों ने बताया कि यदि बारिश का सिलसिला यूं ही जारी रहा तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कृषि विभाग ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है।

जलस्तर उच्चतम स्तर पर

अकोला सिंचाई विभाग के अनुसार जिले के प्रमुख जलप्रकल्पों में जलस्तर लगभग पूर्ण क्षमता तक पहुंच चुका है। काटेपूर्णा प्रकल्प का जलस्तर 347.76 मीटर है, जिसमें 99.65 प्रश जलभंडारण है। दो गेट खुले हैं। इसी तरह तेल्हरा तहसील के वान प्रकल्प में 97.97 प्रश जलभंडारण है, लेकिन गेट बंद हैं और कोई विसर्ग नहीं हो रहा। पातुर तहसील के मोर्ना प्रकल्प में 100 प्रश जल भंडारण है, 5 सेमी नहर से 3.53 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है।

निर्गुणा प्रकल्प और उमा प्रकल्प भी 100 प्रश क्षमता पर हैं, जिनसे क्रमशः 0.906 और 5.60 क्यूमेक्स पानी का विसर्ग हो रहा है। दगडपारवा प्रकल्प में 95.97 प्रश जल भंडारण है, लेकिन गेट बंद हैं और कोई विसर्ग नहीं हो रहा। बारिश के चलते जलप्रकल्पों की स्थिति संतोषजनक है, लेकिन खरीफ फसलों पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है। प्रशासन ने नागरिकों और किसानों को सतर्क रहने की अपील की है।

काटेपूर्णा प्रकल्प, नदी में पानी का विसर्ग बढ़ा

27 सितंबर 2025 को दोपहर 3 बजे काटेपूर्णा प्रकल्प से नदीपात्र में छोड़े जाने वाले पानी का विसर्ग 102.33 घन मीटर/सेकंड से बढ़ाकर 197.92 घन मीटर/सेकंड कर दिया गया है। प्रकल्प में पानी की आवक को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। आवक की स्थिति के अनुसार आगे विसर्ग को और बढ़ाने या घटाने का निर्णय लिया जाएगा।

ऐसे में नदी किनारे बसे गांवों के नागरिकों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और आवश्यक सावधानी बरतें। यह सूचना काटेपूर्णा प्रकल्प पूर नियंत्रण कक्ष द्वारा जारी की गई है। प्रशासन ने नागरिकों से सुरक्षित स्थान पर रहने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संपर्क करने की सलाह दी है।

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