
तुषार आप्टे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Tushar Apte BJP Councillor: महाराष्ट्र के बहुचर्चित ठाणे जिले के बदलापुर स्कूल यौन शोषण मामले ने एक बार फिर सियासी मोड़ ले लिया है। इस मामले में सह-आरोपी और स्कूल के तत्कालीन सचिव तुषार आप्टे को भारतीय जनता पार्टी ने कुलगांव-बदलापुर नगर परिषद में मनोनीत पार्षद नियुक्त किया है, जिससे विवाद खड़ा हो गया है।
ठाणे जिले की कुलगांव-बदलापुर नगर परिषद में शुक्रवार को पांच मनोनीत पार्षदों के चयन की प्रक्रिया पूरी हुई। नगर परिषद की अध्यक्ष रुचिता घोरपड़े ने इन नियुक्तियों की पुष्टि की है। इनमें भाजपा की ओर से तुषार आप्टे और शगुफा गोरे, शिवसेना से दिलीप बैकर व हेमंत चतुरे, और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से प्रभाकर पाटिल को पार्षद बनाया गया है।
अगस्त 2024 में बदलापुर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में दो नाबालिग बच्चियों के साथ हुए यौन उत्पीड़न ने पूरे देश को झकझोर दिया था। घटना के समय तुषार आप्टे स्कूल के सचिव पद पर तैनात थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने इस जघन्य अपराध की जानकारी होने के बावजूद प्रशासन को सूचना नहीं दी। इस लापरवाही के लिए उन पर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 21(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। घटना के 44 दिन बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था, हालांकि उन्हें 48 घंटे के भीतर जमानत मिल गई थी। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है।
तुषार आप्टे की नियुक्ति पर उठ रहे सवालों के बीच भाजपा पार्षद राजन घोरपड़े ने पार्टी के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने तर्क दिया कि आप्टे एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता हैं। घोरपड़े ने कहा कि उनका नाम आरोपी के रूप में आया जरूर है, लेकिन अभी तक उन पर दोष सिद्ध नहीं हुआ है। उन्होंने पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, इसलिए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है।”
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बदलापुर स्कूल यौन शोषण मामले के मुख्य आरोपी अक्षय शिंदे (24) पर स्कूल के शौचालय में दो बच्चियों के यौन शोषण का आरोप था। अगस्त 2024 में उसकी गिरफ्तारी के बाद बदलापुर में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। 23 सितंबर 2024 को नवी मुंबई की तलोजा जेल से पूछताछ के लिए ले जाते समय अक्षय शिंदे की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, अक्षय ने वैन में पुलिसकर्मी की पिस्तौल छीनकर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में हुई जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।
विपक्ष और जनता में आक्रोश एक तरफ जहां मुख्य आरोपी एनकाउंटर में मारा जा चुका है, वहीं सह-आरोपी को राजनीतिक पद दिए जाने से सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों में नाराजगी है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों से जुड़े व्यक्तियों को सार्वजनिक पदों पर नियुक्त करना समाज में गलत संदेश भेजता है, खासकर तब जब मामला अभी कोर्ट में लंबित हो।






