महाराष्ट्र पर पर्यावरणीय महासंकट: 10 लाख प्रजातियां खत्म, 4 गुना बढ़ी आपदाएं; अब रायगड बचाएगा प्रकृति!

Maharashtra Climate Crisis: महाराष्ट्र में पिछले 50 वर्षों में बाढ़ और सूखे का खतरा चार गुना बढ़ गया है। 10 लाख प्रजातियों के विनाश के बीच अब रायगड जिला अपना विशेष 'क्लाइमेट एक्शन प्लान' तैयार करेगा।
Raigad Climate Action Plan
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Updated on

Raigad Climate Action Plan: महाराष्ट्र इस समय एक अभूतपूर्व प्राकृतिक संकट का सामना कर रहा है, जो न केवल राज्य की जैव विविधता बल्कि मानवीय अस्तित्व के लिए भी बड़ी चेतावनी है। रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में पिछले 50 वर्षों के दौरान बाढ़, सूखे और भीषण गर्मी की लहरों (हीटवेव) की तीव्रता में चार गुना तक की भारी वृद्धि देखी गई है। यह केवल प्रकृति में होने वाले सामान्य बदलाव नहीं हैं, बल्कि मानव स्वास्थ्य और भविष्य के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है।

तेजी से खत्म हो रही है जैव विविधता

वातावरण फाउंडेशन के अनुसार, वर्तमान में दुनिया भर में 10 लाख से अधिक प्राकृतिक प्रजातियां पहले ही नष्ट हो चुकी हैं। महाराष्ट्र के संदर्भ में बढ़ते तापमान और अनिश्चित मौसम के कारण बची-कुची जैव विविधता को बचाना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है। महाराष्ट्र के वातावरणीय कृती कक्षा (Climate Action Cell) के संचालक अभिजीत घोरपडे ने स्पष्ट किया है कि निसर्ग चक्र के बिगड़ने से कोंकण और विशेष रूप से रायगड क्षेत्र में समुद्र के जलस्तर में वृद्धि, मैंग्रोव का विनाश और लेप्टोस्पायरोसिस जैसे स्वास्थ्य संबंधी खतरे लगातार बढ़ रहे हैं।

रायगड 'क्लाइमेट एक्शन प्लान' की घोषणा

इस संकट से निपटने के लिए रायगड के जिलाधिकारी किशन जावड़े ने एक ऐतिहासिक पहल की घोषणा की है। रायगड महाराष्ट्र का ऐसा पहला जिला बनने जा रहा है, जो अपना खुद का 'क्लाइमेट एक्शन प्लान' तैयार करेगा। यह योजना विशेष रूप से कार्बन उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को रोकने के लिए एक सुनियोजित रणनीति होगी।

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो और वातावरण फाउंडेशन जैसी संस्थाओं के सहयोग से आयोजित एक सेमिनार में यह निर्णय लिया गया कि शासन व्यवस्था के केंद्र में उन समुदायों को लाया जाएगा जो जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित हैं।

आदिवासी संस्कृति और सामूहिक वन प्रबंधन पर जोर

इस एक्शन प्लान की एक प्रमुख विशेषता आदिवासी समुदायों का सशक्तिकरण है। एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना की अधिकारी तेजस्विनी गलांडे ने बताया कि आदिवासी संस्कृति सदैव पर्यावरण केंद्रित रही है। इसलिए, इस योजना के तहत उन्हें स्थायी और प्रकृति-अनुकूल रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा, सामूहिक वन प्रबंधन का प्रभावी उपयोग इस रणनीति का एक मुख्य हिस्सा होगा, जिससे न केवल वनों का संरक्षण होगा बल्कि स्थानीय लोगों को आपदाओं के प्रति जागरूक करना भी आसान हो जाएगा।

महाराष्ट्र सरकार का लक्ष्य मुंबई, नासिक, सोलापुर और छत्रपति संभाजीनगर जैसे शहरों की तर्ज पर रायगड में भी एक सूक्ष्म नियोजन (Micro-planning) लागू करना है, ताकि भविष्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके।

Navbharat Live
navbharatlive.com