ठाणे-पालघर सहित 5 जिलों में होगा कोलीवाड़ों का सीमांकन, महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, जानें क्या हाेगा फायदा

Koliwada Survey: महाराष्ट्र सरकार ने ठाणे, पालघर सहित 5 तटीय जिलों में कोलीवाड़ों के सर्वे और सीमांकन का फैसला किया है। कोंकण कमिश्नर की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी, जो 3 महीने में रिपोर्ट देगी।
Koliwada Survey: ठाणे-पालघर सहित 5 जिलों में होगा कोलीवाड़ों का सीमांकन, महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, जानें क्या हाेगा फायदा
कोलीवाड़ा (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Koliwada Survey In Konkan Coastal Region: महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछली पकड़ने वाले समुदायों (कोली समाज) के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने ठाणे, पालघर, रायगड़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में स्थित 'कोलीवाड़ा' (मछुआरा बस्तियों) का आधिकारिक सर्वे कर उनकी सीमाओं को निर्धारित (Demarcation) करने का बड़ा फैसला किया है।

काफी समय से यह मांग उठ रही थी कि इन बस्तियों को आधिकारिक भूमि रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। राजस्व विभाग द्वारा जारी शासनादेश (GR) के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए कोंकण विभाग के कमिश्नर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है।

3 महीने में सौंपनी होगी रिपोर्ट

महाराष्ट्र सरकार ने इस कमेटी को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं और अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन महीने की समयसीमा तय की है। वर्तमान में स्थिति यह है कि समुद्र तट के किनारे बसे इन कोलीवाडा की स्पष्ट सीमाएं लैंड रिकॉर्ड ऑफिस (भूमि अभिलेख कार्यालय) में दर्ज नहीं हैं, जिससे स्थानीय निवासियों को कई कानूनी और प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

कैसे होगा सीमांकन?

इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए जिला स्तर पर भी कमेटियां बनाई जाएंगी। इन कमेटियों की मुख्य जिम्मेदारियां निम्नलिखित होंगी।

तहसीलवार सूची: प्रत्येक जिले की तहसीलों के आधार पर कोलीवाडा गांवों की सूची तैयार करना।

बाउंड्री लाइन निर्धारण: 'हाई टाइड लाइन' (सबसे ऊंची लहरों की रेखा), मैरीटाइम बोर्ड की सीमा रेखा और मैंग्रोव जंगलों की बाउंड्री लाइन को स्पष्ट रूप से चिह्नित करना।

गाइडलाइन और सर्वे: सीमांकन की प्रक्रिया के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी करना और भूमि अभिलेखों के साथ उनका मिलान करना।

समुदाय को क्या होगा फायदा?

इस सीमांकन से कोली समुदाय को उनकी पैतृक भूमि पर मालिकाना हक और पहचान मिलने में आसानी होगी। साथ ही, तटीय विकास नियमों (CRZ) के तहत आने वाली समस्याओं और अवैध अतिक्रमण के दावों को सुलझाने में भी यह सर्वे एक निर्णायक भूमिका निभाएगा। सरकार के इस कदम से कोंकण तट के हजारों परिवारों के जीवन में स्थायित्व आने की उम्मीद है।

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